कोलकाता: केंद्रीय मत्स्य मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पश्चिम बंगाल के मत्स्य क्षेत्र की समीक्षा के बाद राज्य में मछली पालन, निर्यात और मछुआरों की सुरक्षा को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में मत्स्य क्षेत्र से जुड़े कामों में हाल के महीनों में तेजी आई है और केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए इसे और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मत्स्य उत्पादन में पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर
राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल अभी भी मत्स्य संसाधनों के उत्पादन के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भी अब इस क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों को गति दी जा रही है।
2 लाख मछुआरे पोर्टल से जुड़े
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में करीब 2 लाख मछुआरों को पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं और सहयोग का लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी। बैठक में मत्स्य पालन के विकास के साथ-साथ इस क्षेत्र के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
तटीय क्षेत्रों में मछली और मड क्रैब पालन पर जोर
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर मछली पालन के साथ मड क्रैब यानी कीचड़ वाले केकड़े के उत्पादन को बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में मत्स्य गतिविधियों को और मजबूत करना है।
ट्रांसपोंडर तकनीक से मछुआरों की सुरक्षा
गहरे समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोंडर तकनीक के जरिए मछुआरों और उनके परिवारों के बीच संपर्क स्थापित करने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही मौसम की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने और समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैटेलाइट से जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार किए जाने की बात भी कही गई।
मत्स्य संपदा योजना के जरिए विकास पर फोकस
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना 2 के माध्यम से पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन के विकास और इससे जुड़े निर्यात को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
बांग्लादेश को 500 टन हिल्सा का निर्यात
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत की ओर से अब तक करीब 500 टन हिल्सा (इलिश) बांग्लादेश को निर्यात की जा चुकी है। इसमें गुजरात, असम और पश्चिम बंगाल से प्राप्त हिल्सा शामिल है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हिल्सा को और अधिक बढ़ावा देने के साथ-साथ मड क्रैब के क्षेत्र पर भी ध्यान दिया जाएगा।