कोलकाता: पश्चिम बंगाल के ‘गुंडादमन’ बिल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब केंद्र सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। PIB की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस विधेयक को राज्य सरकार के पास वापस नहीं भेजा है। फिलहाल बिल केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और विभागों के स्तर पर विचाराधीन है।
PIB ने दी बिल की स्थिति की जानकारी
PIB की ओर से बताया गया है कि West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill, 2026 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने राष्ट्रपति के विचार और मंजूरी के लिए सुरक्षित रखा था। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के विचार और अनुमति के लिए भेजा गया। अब केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय और विभाग इस विधेयक की समीक्षा कर रहे हैं और अपनी राय दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शेयर किया PIB का पोस्ट
इस बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने PIB की ओर से जारी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने उन खबरों पर सवाल उठाया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राष्ट्रपति ने ‘गुंडादमन’ बिल को वापस कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने PIB के पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि बिल को राष्ट्रपति की ओर से लौटाए जाने की बात सही नहीं है।
बिल वापस किए जाने की खबरों से बढ़ा था विवाद
दरअसल, इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि राष्ट्रपति ने विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। कुछ रिपोर्टों में बिल के प्रावधानों और केंद्रीय कानूनों के बीच संभावित टकराव का भी जिक्र किया गया था। इसी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
क्या है ‘गुंडादमन’ बिल?
West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill, 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित किया गया था। इसका उद्देश्य समाजविरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना है। विधेयक में ऐसी विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिन्हें राज्य की सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है।
फिलहाल केंद्र के स्तर पर समीक्षा जारी
PIB की जानकारी के मुताबिक, विधेयक फिलहाल केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और विभागों के पास समीक्षा के लिए है। ऐसे में अभी इसे राष्ट्रपति की ओर से वापस किए जाने की बात सामने नहीं आई है। बिल पर आगे क्या संवैधानिक प्रक्रिया होगी, यह केंद्र स्तर पर चल रही समीक्षा और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।