कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी कर रही है। जिन सरकारी मान्यता प्राप्त निजी मदरसों में बुनियादी ढांचा नहीं है या जहां नामांकित छात्रों की संख्या नगण्य है, उन्हें चिह्नित कर बंद किया जाएगा। बुधवार को राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में आयोजित मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक के दौरान इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ऐसे लगभग 300 मदरसों को बंद करना है।
प्राथमिक सर्वेक्षण में मिलीं खामियां, 100 मदरसों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआती सर्वेक्षण में करीब 250 ऐसे मदरसे पाए गए हैं जो व्यावहारिक रूप से अक्रियाशील हैं। इसके अलावा 100 अन्य मदरसों के प्रशासनिक दस्तावेजों, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों की वास्तविक संख्या की गहन जांच की जा रही है।इन 100 मदरसों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद उन्हें 'कारण बताओ' (Show Cause) नोटिस जारी किया गया है, जिसका जवाब उन्हें दुर्गा पूजा से पहले देना होगा। आशंका जताई जा रही है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनमें से भी 50 से अधिक मदरसों पर गाज गिर सकती है। इस तरह दिसंबर तक बंद होने वाले मदरसों की कुल संख्या लगभग 300 तक पहुंच सकती है।
छात्रों का दूसरे मदरसों में होगा ट्रांसफर, 'खारिजी' मदरसों पर भी सख्ती
राज्य सरकार का उद्देश्य अचल और नाममात्र के छात्रों वाले संस्थानों की सूची बनाकर मदरसा शिक्षा के ढांचे को व्यवस्थित करना है। जिन संस्थानों में बहुत कम छात्र हैं, उन्हें पढ़ाई के नुकसान से बचाने के लिए पास के अन्य संचालित मदरसों में स्थानांतरित (अडॉप्ट/ट्रांसफर) किया जाएगा।नबन्ना के सूत्रों के मुताबिक, राज्य में न तो गैर-मान्यता प्राप्त 'खारिजी' मदरसों को चलने की अनुमति दी जाएगी और न ही बिना बुनियादी ढांचे वाले सरकारी मान्यता प्राप्त निजी मदरसों को। वर्तमान में मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, पूर्व व पश्चिम बर्धमान, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में 252 ऐसे संस्थानों को पहले ही बंद किया जा चुका है।
सत्र खत्म होने के बाद ही जारी होगा अंतिम नोटिस: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री
मदरसों को तुरंत बंद न करके शैक्षणिक सत्र के अंत (दिसंबर) तक का समय देने की वजह स्पष्ट करते हुए राज्य के अल्पसंख्यक विकास मंत्री खुदराम टूडू ने स्थिति साफ की।मंत्री खुदराम टूडू ने कहा, "दिसंबर महीने में शिक्षा विभाग का मौजूदा सत्र (Session) समाप्त होता है। उसके बाद ही सरकार इन मदरसों को बंद करने का अंतिम नोटिस जारी करेगी। अगर सत्र के बीच में इन्हें बंद किया गया तो छात्रों के बीच 'ड्रॉपआउट' (पढ़ाई छोड़ने) की संख्या बढ़ सकती है। अधिकारियों द्वारा एक बार सर्वे किया जा चुका है और अंतिम कार्रवाई से पहले एक और समीक्षा की जाएगी।"