कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कैब चालकों को निशाना बनाकर लूटपाट और हत्या करने के दो मामलों में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये घटनाएं हुगली जिले के डानकुनी और कोलकाता के एंटाली इलाके में सामने आई थीं। पुलिस की जांच में दोनों वारदातों के बीच समानता मिलने के बाद आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी यात्री बनकर कैब चालकों से संपर्क करते थे और सुनसान जगह पर ले जाकर उन्हें निशाना बनाते थे।
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल से मिले सुराग
पुलिस ने कोलकाता पुलिस और चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट के बीच समन्वय के साथ मामले की जांच की। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से जुड़े सुरागों की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई। गिरफ्तार आरोपियों के नाम मोहम्मद मनीरुल गाजी, शेख सहादत और मोहम्मद आरियान मोल्ला बताए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम और निमता इलाके से पकड़ा गया।
डानकुनी में मिला था कैब चालक का शव
पहली घटना 5 अक्टूबर 2026 को हुगली जिले के डानकुनी इलाके में सामने आई। दिल्ली रोड पर भादुआ मोड़ के पास पुलिस को एक व्यक्ति बेहोशी की हालत में मिला था। उसके पैर नायलॉन की रस्सी से बंधे हुए थे। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में उसकी पहचान 58 वर्षीय रामजस कौरी के रूप में हुई, जो उत्तर दमदम के बांकरा इलाके के निवासी और पेशे से ऐप-कैब चालक थे।
एयरपोर्ट के पास से कैब लेकर निकले थे आरोपी
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 4 अक्टूबर की रात एयरपोर्ट इलाके के पास रामजस की कैब किराये पर ली थी। बताया गया कि उन्होंने ऐप के जरिए बुकिंग करने के बजाय चालक से सीधे गाड़ी किराये पर लेने की बात की थी। आरोप है कि रास्ते में सुनसान जगह पहुंचने पर पीछे बैठे एक व्यक्ति ने चालक का गला दबाया, जबकि दूसरे ने गाड़ी रोकने के लिए हैंडब्रेक खींचा। इसके बाद चालक को गाड़ी से बाहर निकालकर उसके पैर बांध दिए गए और उसे सड़क किनारे छोड़ दिया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी कैब लेकर कोलकाता के बेनियापुकुर इलाके तक पहुंचे थे। हालांकि, गाड़ी बेचने की उनकी कथित योजना सफल नहीं हुई और वे वाहन छोड़कर फरार हो गए।
एंटाली में दूसरी कैब में मिला चालक का शव
दूसरी घटना 7 अक्टूबर को कोलकाता के एंटाली इलाके की डीसी डे रोड पर सामने आई। यहां एक बंद ऐप-कैब के भीतर 44 वर्षीय चालक भगवान प्रसाद गुप्ता का शव मिला। वह मध्यमग्राम के डोलतला इलाके के निवासी थे। उनके पैर बंधे हुए थे और चेहरे पर चोट के निशान थे। पुलिस के अनुसार, उनका मोबाइल फोन और नकदी भी गायब थे।
डानकुनी मामले की जांच के दौरान दोनों घटनाओं में वारदात के तरीके की समानता सामने आई। इसके बाद पुलिस को शक हुआ कि दोनों हत्याओं के पीछे एक ही गिरोह का हाथ हो सकता है। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
क्या गाड़ियों को दूसरे राज्यों में बेचने की थी योजना?
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों का मकसद कैब चालकों से लूटपाट करने के साथ-साथ उनके वाहनों को चोरी के बाजार में बेचने का था या नहीं। पुलिस को संदेह है कि इस मामले में वाहन चोरी करने वाले किसी बड़े गिरोह की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि, गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और अपराध के पूरे नेटवर्क को लेकर जांच जारी है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर दोनों हत्याओं की परिस्थितियों, लूटे गए सामान और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। मामले में आरोपियों की भूमिका की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।