कोलकाता: कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल में शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करने के नियमों में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने मंगलवार को इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए। नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी जगह को नए लाइसेंस के लिए ‘नया स्थल’ या ‘मौजूदा स्थल’ कब माना जाएगा। इसके साथ ही पहले से शराब कारोबार के लिए इस्तेमाल हो चुकी जगहों को दोबारा लाइसेंस देने का रास्ता भी आसान किया गया है। लाइसेंस रद्द होने, वापस लिए जाने या सरेंडर किए जाने के कारण बंद हुई दुकानों के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से लाइसेंस प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट बनाया जा सकेगा।
स्कूल, धार्मिक स्थल और अस्पताल से 500 मीटर की दूरी
शहरी क्षेत्रों में नए शराब लाइसेंस के लिए दूरी से जुड़ा नियम भी बदला गया है। अब धार्मिक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों से प्रस्तावित शराब दुकान की दूरी 500 मीटर रखी गई है। इससे पहले यह सीमा 1,000 फीट यानी करीब 305 मीटर थी। हालांकि, यह नया 500 मीटर का नियम केवल नए लाइसेंस पर लागू होगा। पहले से संचालित मौजूदा शराब दुकानों को इस बदलाव के दायरे में नहीं लाया गया है। सरकार ने नए लाइसेंस के लिए जगह तय करने के नियमों को इसी आधार पर स्पष्ट किया है।
पुरानी और बंद दुकानों के लिए नई व्यवस्था
नए नियमों के तहत पहले शराब कारोबार के लिए इस्तेमाल हो चुकी कुछ जगहों को ‘मौजूदा स्थल’ की श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा। खास तौर पर ऐसी दुकानें जिनका लाइसेंस रद्द, वापस या सरेंडर होने के कारण कारोबार बंद हो गया था, उन्हें नए लाइसेंस के लिए विचार किया जा सकता है। इसका मतलब है कि हर मामले में पूरी तरह नई जगह तलाशने की जरूरत नहीं होगी। पुराने लाइसेंस वाले परिसरों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत फिर से इस्तेमाल करने का रास्ता खुलेगा। इससे बंद पड़े शराब कारोबार वाले परिसरों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में बदलाव आएगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में ‘नए स्थल’ और ‘मौजूदा स्थल’ की परिभाषा को स्पष्ट किया है।
4(H) से 4(K) लाइसेंस वाली दुकानों को भी मौका
विदेशी शराब की दुकानों के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। 4(H) से 4(K) श्रेणी के लाइसेंस पर चलने वाली किसी विदेशी शराब की ‘ऑन’ शॉप को कुछ परिस्थितियों में 4(P) श्रेणी के लाइसेंस के तहत इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। यानी पहले से शराब कारोबार के लिए इस्तेमाल हो रहे परिसर को नई लाइसेंस श्रेणी में लाने का विकल्प मिलेगा। इससे पुराने लाइसेंस वाले परिसरों को नए लाइसेंस ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। हालांकि, इसके लिए संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों का पालन जरूरी होगा। नए प्रावधान का उद्देश्य लाइसेंस श्रेणियों और साइट की स्थिति को स्पष्ट करना भी है।
पुराने आवेदनों पर भी लागू होंगे नए नियम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों में संशोधन से पहले जमा किए गए कुछ लंबित आवेदनों का निपटारा नए प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। 4(P) श्रेणी के नए लाइसेंस जारी करने के लिए दो अतिरिक्त प्रकार की जगहों को ‘मौजूदा स्थल’ माना जाएगा। इनमें 4(H) से 4(K) श्रेणी की चालू FL ‘ऑन’ शॉप शामिल है, अगर वहीं से 4(P) लाइसेंस के तहत कारोबार संचालित किया जाना है। इसके अलावा पहले लाइसेंस रद्द, वापस या सरेंडर होने के कारण बंद हुई खुदरा बिक्री वाली जगह को भी इस श्रेणी में रखा गया है। इससे लंबित लाइसेंस आवेदनों के निपटारे में नए नियमों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
सरकार को राजस्व बढ़ने की उम्मीद
राज्य सरकार के इन बदलावों के पीछे राजस्व बढ़ाने का पहलू भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। बंद पड़ी दुकानों और पहले से शराब कारोबार के लिए इस्तेमाल हो चुके परिसरों को नए लाइसेंस ढांचे में लाने से कारोबार के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो सकती है। आबकारी विभाग को उम्मीद है कि इससे शराब बिक्री से मिलने वाले सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी। साथ ही लाइसेंस की अलग-अलग श्रेणियों और साइट की स्थिति को लेकर बनी अस्पष्टता कम करने की कोशिश की गई है। हालांकि, नए लाइसेंस के लिए निर्धारित दूरी और अन्य कानूनी शर्तों का पालन करना होगा। नए नियमों का वास्तविक असर लाइसेंस जारी होने और उनके अनुपालन के बाद स्पष्ट होगा।