कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षकों की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार मदरसा सेवा आयोग को समाप्त कर पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) में उसका विलय करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अलग भर्ती आयोग की व्यवस्था खत्म हो सकती है। इसके स्थान पर WBSSC के माध्यम से भर्ती का रास्ता तैयार किया जाएगा। इस फैसले को लागू करने के लिए राज्य सरकार को मौजूदा कानूनों में संशोधन करना होगा। इसके लिए विधानसभा में दो अलग-अलग विधेयक पेश किए जाने की संभावना है।
1. अलग मदरसा भर्ती आयोग की व्यवस्था होगी खत्म
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मदरसा सेवा आयोग को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद राज्य में मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होगा। फिलहाल मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की भर्ती के लिए अलग आयोग काम करता है। प्रस्तावित योजना के तहत इस जिम्मेदारी को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग को सौंपने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को एक साझा प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत लाना है। हालांकि, इस फैसले को लागू करने से पहले संबंधित कानूनों में बदलाव करना जरूरी होगा। जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक नई भर्ती व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सकेगी।
2. विधानसभा में पेश किए जा सकते हैं दो अलग-अलग विधेयक
मदरसा सेवा आयोग के प्रस्तावित विलय को कानूनी रूप देने के लिए राज्य सरकार विधानसभा में दो अलग-अलग विधेयक पेश कर सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पहले विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव होगा। इसके तहत अलग मदरसा भर्ती आयोग के अस्तित्व को समाप्त करने का रास्ता तैयार किया जाएगा। वहीं, दूसरे विधेयक के माध्यम से पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग अधिनियम में संशोधन किया जा सकता है। इस संशोधन के बाद WBSSC को मदरसों में शिक्षकों की भर्ती करने का कानूनी अधिकार मिल सकेगा। दोनों विधेयकों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई व्यवस्था के कार्यान्वयन का रास्ता साफ होगा। फिलहाल इस संबंध में विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
3. कानून में बदलाव के बाद ही शुरू होगी नई भर्ती प्रक्रिया
मदरसा शिक्षकों की भर्ती के लिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विनोद कुमार के अनुसार, विलय को लेकर इस साल कदम उठाया जाएगा। प्रस्तावित विधेयकों को विधानसभा से पारित कराने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित कानूनों में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद राजपत्र में अधिसूचना जारी होने पर नई व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि केवल मंत्रिमंडल के फैसले से भर्ती व्यवस्था तत्काल नहीं बदलेगी। कानूनी मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
4. WBSSC को भी संशोधित कानून की अधिसूचना का इंतजार
मदरसा सेवा आयोग के प्रस्तावित विलय के बाद पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। WBSSC के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, संशोधित कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद ही आयोग मदरसों में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। नई भर्ती के लिए संशोधित अधिनियम और उसके तहत बनाए जाने वाले नियमों का पालन करना होगा। इन नियमों में भर्ती से जुड़ी पात्रता, प्रक्रिया और अन्य आवश्यक प्रावधान निर्धारित किए जा सकते हैं। इससे मदरसों में नियुक्तियों को स्कूल सेवा आयोग के प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, नई व्यवस्था के तहत भर्ती कब शुरू होगी, यह कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित नियमों के लागू होने पर निर्भर करेगा। फिलहाल अभ्यर्थियों को सरकार की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा।
5. सरकार का दावा- भर्ती प्रक्रिया में आएगी एकरूपता
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, मदरसा सेवा आयोग को WBSSC में मिलाने का उद्देश्य शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। सरकार अलग-अलग भर्ती संस्थाओं के बजाय एक साझा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित बदलाव से मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अलग आयोग पर निर्भरता समाप्त हो सकती है। इसके स्थान पर स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया संचालित की जाएगी। सरकार का मानना है कि एक साझा ढांचा होने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी, यह इसके कार्यान्वयन और भर्ती नियमों पर निर्भर करेगा। अभ्यर्थियों के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी संशोधित कानून और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।
6. वर्ष 2007 में हुई थी मदरसा सेवा आयोग की स्थापना
पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग की स्थापना वर्ष 2007 में एक अलग कानून के तहत की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य राज्य के मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती करना था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह आयोग पश्चिम बंगाल के 614 मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी जिम्मेदारी निभाता रहा है। अलग आयोग होने के कारण मदरसों की भर्ती के लिए स्वतंत्र व्यवस्था संचालित की जाती थी। अब राज्य सरकार इस व्यवस्था को बदलकर WBSSC के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विलय लागू होने पर मदरसा शिक्षकों की भर्ती का प्रशासनिक ढांचा बदल जाएगा। हालांकि, मौजूदा भर्ती नियमों और नई व्यवस्था के बीच किस तरह तालमेल बनाया जाएगा, इसका विवरण संशोधित कानून और संबंधित नियमों से स्पष्ट होगा।
7. मदरसों को लेकर प्रशासनिक बदलावों के बीच आया फैसला
पश्चिम बंगाल में मदरसों से संबंधित प्रशासनिक फैसलों के बीच भर्ती व्यवस्था में बदलाव की यह तैयारी सामने आई है। खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, सितंबर में राज्य सरकार ने सर्वेक्षण के बाद 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके अलावा, करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। सरकार की ओर से कहा गया था कि आवश्यक मंजूरी और निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित होने वाले मदरसों को जारी रहने दिया जाएगा। इन कदमों के साथ मदरसा सेवा आयोग के प्रस्तावित विलय को भी राज्य की व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, मदरसों से जुड़े प्रत्येक फैसले का कानूनी आधार और उसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में भर्ती व्यवस्था में बदलाव और मदरसों के संचालन से संबंधित निर्णयों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
8. मदरसा शिक्षकों और अभ्यर्थियों की नजर आधिकारिक अधिसूचना पर
मदरसा सेवा आयोग के प्रस्तावित विलय से राज्य में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था बदल सकती है। नई प्रणाली लागू होने के बाद मान्यता प्राप्त मदरसों में नियुक्तियों के लिए WBSSC की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। हालांकि, भर्ती की तारीख, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और चयन के नियमों को लेकर अंतिम स्थिति संशोधित कानून और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी। अभ्यर्थियों को सरकार तथा संबंधित आयोग की घोषणाओं पर नजर रखनी होगी। जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक प्रस्तावित बदलाव को लागू हो चुकी व्यवस्था नहीं माना जा सकता। फिलहाल सरकार की योजना मदरसा शिक्षकों की भर्ती को एक साझा आयोग के अंतर्गत लाने की है। इस फैसले का वास्तविक असर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद सामने आएगा।