कोलकाता : पश्चिम बंगाल के प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बनाए रखने और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। बिना पूर्व अनुमति के लंबे समय तक स्कूल से गायब रहने या नियम तोड़कर छुट्टी लेने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने सभी जिलों के प्राथमिक शिक्षा निरीक्षकों (DI) को सीधे विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। राज्य सचिवालय के विकास भवन द्वारा 21 सितंबर को इस संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है।
अनधिकृत अनुपस्थिति पर रोक और विकास भवन की कड़ी चेतावनी
लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि राज्य सरकार के प्राथमिक विद्यालयों के कुछ शिक्षक बिना उचित कारण बताए लंबे समय तक अनुपस्थित रह रहे हैं। विकास भवन के संज्ञान में यह भी आया है कि हाल ही में डीए (DA) बढ़ोतरी और टेट (TET) से जुड़े विभिन्न आंदोलनों व कार्यक्रमों में भाग लेने के दौरान भी कई शिक्षकों ने नियमानुसार छुट्टी लिए बिना ही स्कूल छोड़ दिया।शिक्षकों के इस रवैये से छात्रों की पढ़ाई पर सीधे तौर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। शिक्षा में इस नुकसान को रोकने और स्कूलों में कार्य संस्कृति को बहाल करने के लिए राज्य शिक्षा आयुक्त ने यह सख्त फैसला लिया है।
लंबित छुट्टियों की होगी गहन जांच, उचित कारण न होने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों के जो आवेदन फिलहाल लंबित हैं या जहां बिना मंजूरी के अनुपस्थिति दर्ज की गई है, जिला शिक्षा निरीक्षकों को उन सभी की सत्यता की मौके पर जाकर जांच करनी होगी।यदि जांच में यह पाया जाता है कि कोई शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के अनुपस्थित था, लेकिन इसके पीछे कोई वाजिब या आपातकालीन कारण मौजूद है, तो नियमानुसार छुट्टी मंजूर की जा सकती है। हालांकि, यदि शिक्षक उचित कारण प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं या जानबूझकर अनुपस्थित रहना साबित होता है, तो किसी भी स्थिति में छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी। उल्टा संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
30 दिनों के भीतर विकास भवन को देनी होगी पूरी रिपोर्ट
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस आदेश को राज्य भर में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक जिले में बिना अनुमति के छुट्टी लेने या लंबित छुट्टियों से जुड़े कितने मामले अटके हुए हैं और निर्देश मिलने के बाद उनके खिलाफ क्या-क्या कार्रवाई की गई, इसका पूरा विवरण तैयार करना होगा।विभाग ने सख्त समय-सीमा तय करते हुए निर्देश दिया है कि अगले 30 दिनों के भीतर यह पूरी रिपोर्ट विकास भवन स्थित स्कूल शिक्षा आयुक्त के कार्यालय में जमा करानी होगी।