नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिका और अपील प्राधिकारी के पास लंबित 18,000 से अधिक मामलों पर त्वरित सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। 6 अक्टूबर को राज्य की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले इस याचिका को मेंशन किया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई पूर्व निर्धारित तिथि 5 अक्टूबर को ही होगी।
अदालत में वकीलों की दलील और मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं के वकील ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के समक्ष मामला मेंशन करते हुए दलील दी कि 18,000 से अधिक मतदाताओं की याचिकाएं अपीलीय प्राधिकारी के पास लंबित पड़ी हुई हैं। वकीलों का तर्क था कि यदि 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले इस विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित क्षेत्रों के नागरिक लगातार दूसरी बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाएंगे।याचिकाकर्ताओं की इस मांग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, *‘‘ये महज उपचुनाव हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं।‘‘* इसके बाद शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि मामले की सूची में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और सुनवाई 5 अक्टूबर को ही संपन्न होगी।
18,000 मतदाताओं के वोटिंग अधिकार पर अनिश्चितता
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से ठीक एक दिन पहले 5 अक्टूबर को सुनवाई तय होने के कारण, लंबित अपीलों वाले इन 18,000 से अधिक आवेदकों के उपचुनाव में भाग लेने पर गंभीर अनिश्चितता बन गई है। यदि 5 अक्टूबर को कोई अंतिम आदेश जारी नहीं होता है, तो इन मतदाताओं के लिए मतदान प्रक्रिया में शामिल होना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।
चुनाव आयोग की दलील
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। टीएमसी के इस दावे को आयोग ने खारिज कर दिया था कि SIR प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की वजह से पार्टी को 31 विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। आयोग ने कहा था कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत आंकड़े भ्रामक हैं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की अलग-अलग श्रेणियों की गलत गणना की गई है।