नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में वोटर सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) के तहत नाम शामिल करने और हटाए जाने के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एक विस्तृत हलफनामा पेश किया है। आयोग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर के एसआईआर ट्रिब्यूनल (SIR Tribunal) में अपीलों का पहाड़ खड़ा हो गया है। बेहद धीमी गति से हो रहे निपटारे के कारण वर्तमान में राज्यभर में 37 लाख से अधिक मामले लंबित पड़े हैं। आयोग ने शीर्ष अदालत को चेतावनी दी है कि यदि कार्य की वर्तमान गति यही रही, तो इन सभी आवेदनों के निपटारे में कम से कम 12 साल का समय लग जाएगा।
38 लाख से अधिक आवेदन जमा, 22 लाख से ज्यादा लोग नाम वापस जोड़ने की मांग पर अड़े
निर्वाचन आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्यभर से ट्रिब्यूनल में कुल 38 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन नागरिकों का है जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, 22.21 लाख से अधिक आवेदन उन लोगों द्वारा दाखिल किए गए हैं जो मतदाता सूची में अपना नाम पुनः शामिल कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, मतदाता सूची में नए नाम शामिल किए जाने के फैसलों को चुनौती देते हुए अन्य आवेदकों द्वारा लगभग 16.10 लाख आवेदन जमा किए गए हैं।
मुर्शिदाबाद में स्थिति सबसे गंभीर, 7.47 लाख अपीलों में से केवल 514 का हुआ निपटारा
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो लंबित मामलों के मामले में मुर्शिदाबाद जिला राज्य में सबसे खराब स्थिति में है।
- मुर्शिदाबाद: कुल 7,47,921 आवेदन जमा हुए, जिनमें से अब तक केवल 514 आवेदनों का ही निष्पादन हो सका है।
- मालदा: कुल 5,31,345 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से महज 1,514 मामलों का निपटारा हुआ है।
- उत्तर 24 परगना: 3,59,375 आवेदन दाखिल किए गए, जिनमें से केवल 301 का निपटारा किया जा सका है।
- दक्षिण 24 परगना: 3,21,754 आवेदनों में से 22,049 मामलों का निष्पादन किया गया है।
5 महीने में केवल 1.26 लाख निष्पादन, ट्रिब्यूनल की संख्या 19 से बढ़ाकर 42 करने की सिफारिश
चुनाव आयोग ने अदालत को अवगत कराया कि पिछले पांच महीनों के दौरान गठित ट्रिब्यूनल द्वारा केवल 1,26,194 अपीलों का ही निपटारा किया जा सका है। 37 लाख से अधिक लंबित मामलों को देखते हुए आयोग ने अपनी चिंता व्यक्त की है। इस प्रशासनिक संकट और विधिक सुस्ती से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य में ट्रिब्यूनल की कुल संख्या 19 से बढ़ाकर 42 करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि मामलों की सुनवाई तेज की जा सके।
12 साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, न्यायिक तंत्र पर बढ़ा दबाव
एसआईआर प्रक्रिया के बाद पैदा हुए इस भारी बैकलाग ने राज्य के मतदाता अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित विशेष ट्रिब्यूनल की सीमित संख्या के कारण आवेदकों को अपनी सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यदि आयोग के प्रस्ताव के अनुसार ट्रिब्यूनल की संख्या में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की जाती है, तो लाखों वैध मतदाताओं के मताधिकार पर लंबे समय तक अनिश्चितता के बादल छाए रहेंगे।