बजट 2026 में वित्त मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत वैश्विक व्यापार अस्थिरता के बीच अपने निर्यात क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आक्रामक और सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाएगा। अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ से भारतीय उत्पादों को झटका लगा था, ऐसे में सरकार की यह राहत विदेशी बाज़ारों में भारत की पकड़ मजबूत करेगी। इन सुधारों के जरिए सरकार न केवल निर्यातकों का बोझ कम कर रही है, बल्कि उन्हें अधिक समय, अधिक लचीलापन और अधिक संसाधन उपलब्ध करा रही है।
सीफूड निर्यातकों के लिए ड्यूटी-फ्री आयात सीमा तीन गुना
सरकार ने सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पहले जहाँ निर्यातक केवल अपनी पिछले वर्ष की FOB वैल्यू के 1% तक कच्चा माल ड्यूटी-फ्री आयात कर सकते थे, अब यह सीमा 3% कर दी गई है। समुद्री उत्पादों की प्रोसेसिंग में कई विशेष इनपुट की आवश्यकता होती है, जिन पर आयात शुल्क निर्यात लागत को बढ़ा देता था। नई सीमा से इन निर्यातकों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी और भारतीय समुद्री उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
लेदर और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए निर्यात समयसीमा दोगुनी
लेदर और टेक्सटाइल जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के लिए सरकार ने समयसीमा बढ़ाकर 6 महीने से 1 वर्ष कर दी है। इस फैसले से विशेष रूप से उन उत्पादकों को राहत मिलेगी जो डिजाइन आधारित या उच्च कौशल वाले उत्पाद बनाते हैं और जिन्हें उत्पादन से निर्यात तक अधिक समय चाहिए होता है। निर्यातकों का नकदी प्रबंधन भी इससे बेहतर होगा और उन्हें बिना दबाव के गुणवत्ता बनाए रखने का अवसर मिलेगा।
अमेरिकी टैरिफ से जूझ रहे भारतीय निर्यात
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2025 में भारतीय आयात पर 50% तक का भारी शुल्क लगा दिया था। इससे सीफूड, लेदर, टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे क्षेत्रों को बड़ा नुकसान हुआ, क्योंकि अमेरिका इनका प्रमुख बाज़ार है। बजट 2026 के नए प्रावधान इन उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद करेंगे और आयात शुल्क से हुई क्षति की भरपाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
वैश्विक व्यापार जोखिमों पर FM का चेतावनी संकेत
संसद में अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि आज दुनिया ऐसे दौर में है जहाँ मल्टीलेटरलिज़्म, सप्लाई चेन और संसाधनों तक पहुंच गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसलिए भारत के लिए निर्यातकों को मजबूत बनाना और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। बजट में इस मिशन के लिए 2,300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जो नए युग के व्यापार मॉडल को गति देगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए 40,000 करोड़ और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए भी 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ये क्षेत्र भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएँगे, साथ ही निर्यात क्षमता को भी कई गुना बढ़ा सकते हैं।
सर्विस सेक्टर को बढ़ावा: शिक्षा से रोजगार तक नई समिति
सेवा क्षेत्र को 2047 तक वैश्विक हिस्सेदारी के 10% तक पहुँचाने के लक्ष्य के साथ सरकार ने ‘Education to Employment and Enterprise’ हाई-पावर्ड स्टैंडिंग कमेटी की घोषणा की है। सेवा क्षेत्र भारत के GDP और निर्यात में 50% से अधिक योगदान देता है, इसलिए इस सेक्टर को नई नीतिगत सहायता देना भारत के आर्थिक भविष्य के लिए निर्णायक होगा।
Comments (0)