केंद्रीय बजट 2026 ने भारत की आर्थिक दिशा में एक बड़ा मोड़ दिखाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को भारत के भविष्य का मूल स्तंभ बताया। दुनिया जब नई कल्पनाशील और सांस्कृतिक आर्थिक संरचना की तरफ बढ़ रही है, भारत भी अब केवल टेक्नोलॉजी पावर नहीं बल्कि ग्लोबल क्रिएटिव हब बनने की ओर निर्णायक कदम उठा रहा है।
ऑरेंज इकोनॉमी क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
सरल भाषा में कहें तो ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ वह आर्थिक ढांचा है जिसमें कमाई का मुख्य स्रोत मानव की कल्पना, रचनात्मकता और संस्कृति होती है। यह वह सेक्टर है जहाँ दिमाग की क्रिएटिविटी ही पूंजी बन जाती है।
फिल्में, एनीमेशन, गेमिंग, संगीत, डिजाइन, डिजिटल आर्ट, विज्ञापन, आर्किटेक्चर, फैशन और कॉमिक्स जैसे उद्योग इस इकोनॉमी का आधार हैं। यह न केवल आर्थिक लाभ पैदा करती है, बल्कि समाज की सांस्कृतिक दिशा भी तय करती है। विकसित देशों में यह बड़ी आय का स्रोत बन चुका है—भारत का लक्ष्य अब इस क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना है।
AVGC सेक्टर: भविष्य का रोजगार इंजन
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) उद्योग की अतुलनीय क्षमता को रेखांकित किया। भारत में युवा प्रतिभा की संख्या और डिजिटल अपनाने की तेज़ रफ्तार को देखते हुए सरकार ने 2030 तक इस सेक्टर में 20 लाख नए प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
युवाओं को उद्योग-तैयार बनाने के लिए 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएँगी। यह पहल ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज’ के सहयोग से चलाई जाएगी, जिससे देश में क्रिएटर इकोसिस्टम का बड़ा विस्तार होगा।
डिजाइन उद्योग को नई ऊर्जा: पूर्वोत्तर में नया NID
भारत में डिजाइनिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) स्थापित करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य देशभर के डिजाइन टैलेंट को वैश्विक स्तर का प्रशिक्षण देना और डिज़ाइन-आधारित स्टार्टअप्स को मजबूत करना है।
यह न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार और नवाचार को बढ़ाएगा, बल्कि भारत के डिजाइन सेक्टर को एक नई पहचान भी प्रदान करेगा।
क्रिएटिविटी, संस्कृति और नई अर्थव्यवस्था की त्रिवेणी
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएँ अब रचनात्मक क्षमताओं पर निर्भर होती जा रही हैं। ऑरेंज इकोनॉमी ऐसे उद्योगों को जन्म देती है जहाँ पारंपरिक संसाधन नहीं, बल्कि मनुष्य की कल्पनाशीलता, कला और प्रतिभा मुख्य संपत्ति होती है। भारत में विशाल युवा जनसंख्या, डिजिटल कौशल और सांस्कृतिक विविधता इसे और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
सरकार का यह कदम भारत को केवल नौकरी-आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि क्रिएटिव इनोवेशन-चालित वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
भारत का भविष्य: असीम संभावनाओं वाला ‘क्रिएटिव नेशन’
अगर सरकार की घोषित योजनाएँ समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो भारत आने वाले दशक में फिल्मों, गेमिंग, एनीमेशन, डिजिटल डिजाइन, विज्ञापन, और कंटेंट क्रिएशन में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। ऑरेंज इकोनॉमी न केवल युवाओं को नए अवसर देगी, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर—संस्कृति, कला और नवाचार—को विश्व मंच पर अभूतपूर्व स्थान दिलाएगी।
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