स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2030 तक भारत ‘उच्च-मध्यम आय’ वाला देश बन सकता है, जिससे वह चीन और इंडोनेशिया की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। यह आकलन भारत की निरंतर आर्थिक वृद्धि और संरचनात्मक सुधारों पर आधारित है।
विश्व बैंक की आय श्रेणियां और वैश्विक बदलाव
विश्व बैंक देशों को प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के आधार पर चार श्रेणियों—निम्न आय, निम्न-मध्यम आय, उच्च-मध्यम आय और उच्च आय—में वर्गीकृत करता है। SBI रिपोर्ट बताती है कि 1990 में जहां 51 देश निम्न आय श्रेणी में थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या घटकर 26 रह गई है। इसके विपरीत उच्च आय वाले देशों की संख्या बढ़कर 87 हो चुकी है, जो वैश्विक आर्थिक बदलावों को दर्शाती है।
60 वर्षों में बदला भारत का आय स्तर
रिपोर्ट के अनुसार स्वतंत्रता के बाद भारत को निम्न-मध्यम आय की श्रेणी तक पहुंचने में लगभग 60 वर्ष लगे। 1962 में भारत की प्रति व्यक्ति GNI मात्र 90 डॉलर थी, जो 2007 तक बढ़कर 910 डॉलर हो गई। इसके बाद 2009 में यह 1,000 डॉलर, 2019 में 2,000 डॉलर तक पहुंची और 2026 तक इसके 3,000 डॉलर होने का अनुमान है। यह आंकड़े भारत की लंबी लेकिन स्थिर आर्थिक यात्रा को दर्शाते हैं।
2030 तक उच्च-मध्यम आय देश बनने की राह
SBI रिसर्च का अनुमान है कि भारत 2030 तक प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर के स्तर को छू सकता है। ऐसा होने पर भारत आधिकारिक रूप से ‘उच्च-मध्यम आय’ वाले देशों की श्रेणी में आ जाएगा और चीन तथा इंडोनेशिया के समूह में शामिल हो जाएगा। यह उपलब्धि भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना में बड़े बदलाव का संकेत होगी।
2047 का लक्ष्य: उच्च-आय भारत
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत को 2047 तक उच्च-आय वाला देश बनना है, तो प्रति व्यक्ति GNI में 7.5 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर बनाए रखना आवश्यक होगा। सकारात्मक तथ्य यह है कि 2001 से 2024 के बीच यह वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत रही है। हालांकि यदि उच्च-आय की वैश्विक सीमा 18,000 डॉलर तक बढ़ती है, तो भारत को 8.9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी।
GDP में ऐतिहासिक छलांग की तैयारी
SBI रिसर्च के अनुसार भारत 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2035 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। अमेरिका और चीन के बाद भारत 2028 तक जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उल्लेखनीय है कि 1990 में भारत वैश्विक GDP रैंकिंग में 14वें स्थान पर था, जो 2025 तक चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।
वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय
यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भारत की आर्थिक प्रगति अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ठोस उपलब्धियों की दिशा में बढ़ रही है। मजबूत जनसांख्यिकी, बढ़ता उपभोक्ता बाजार और नीतिगत सुधार भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।
Comments (0)