विश्वभर में आर्थिक दबाव, युद्ध की स्थितियाँ और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिरता का परिचय दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति घोषणा के दौरान स्पष्ट कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। घरेलू मांग, मजबूत नीतिगत समर्थन और स्थिर वित्तीय वातावरण ने देश को वैश्विक परिस्थितियों के प्रभाव से काफी हद तक बचाए रखा है।
रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय
मौद्रिक नीति समिति ने आर्थिक गतिविधियों को संतुलित रखने के उद्देश्य से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह निर्णय दर्शाता है कि RBI मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और वृद्धि में संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। ब्याज दरों को स्थिर रखने से कर्ज लेने की लागत में कोई अतिरिक्त दबाव नहीं बनेगा, जिससे निवेश और उपभोग दोनों को समर्थन मिलेगा।
GDP ग्रोथ के अनुमान में मजबूती और नई सांख्यिकीय श्रृंखला का संकेत
RBI ने चालू वित्त वर्ष में वास्तविक GDP वृद्धि दर को 7.4% रहने का अनुमान जताया है, जो वैश्विक वातावरण के दृष्टिकोण से अत्यंत सकारात्मक संकेत है। गवर्नर मल्होत्रा ने यह भी बताया कि GDP व मुद्रास्फीति मापने के लिए जल्द ही नई सांख्यिकीय श्रृंखला लागू की जाएगी, जिससे डेटा और अधिक विश्वसनीय व सटीक होगा। नई सीरीज लागू होने के बाद वित्त वर्ष 2027 के GDP अनुमानों की घोषणा अप्रैल की मौद्रिक नीति बैठक में की जाएगी।
आगामी तिमाहियों और वित्त वर्षों के लिए उन्नत अनुमान
FY26 के लिए GDP अनुमान को 7.3% से संशोधित कर 7.4% कर दिया गया है। तीसरी तिमाही के लिए अनुमान 7% पर स्थिर रखा गया है, जबकि चौथी तिमाही में 6.5% वृद्धि की संभावना जताई गई है। आगे बढ़ते हुए FY27 की पहली तिमाही के लिए अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 6.9% और दूसरी तिमाही के लिए 6.8% से 7% कर दिया गया है। ये संकेत बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बरकरार रहेगी और वृद्धि का चक्र लगातार मजबूत होता जाएगा।
GVA वृद्धि और प्रमुख सेक्टरों की भूमिका
आर्थिक विकास के वास्तविक पैमाने GVA में भी उल्लेखनीय सुधार का अनुमान है। RBI ने इसे 7.3% तक पहुंचते देखने की उम्मीद जताई है। सेवा क्षेत्र इस विकास का सबसे बड़ा आधार बना रहेगा, जहां निरंतर सुधार और मांग में इजाफा देखा जा रहा है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में भी मजबूत उछाल के संकेत मिल रहे हैं, जो रोजगार और निवेश दोनों को गति देंगे। घरेलू मांग की दृढ़ता और निवेश माहौल में सुधार यह दर्शाते हैं कि भारत अपनी आंतरिक आर्थिक शक्ति के बल पर बाहरी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर रहा है।
भारत की विकास यात्रा में स्थिरता और विश्वास की पुनः पुष्टि
RBI के ताज़ा अनुमानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल विकास पथ पर है, बल्कि निरंतर गति प्राप्त कर रही है। यह स्थिरता निवेशकों, उद्योगों और आम जनता—सभी के लिए आश्वस्त करने वाली है। आने वाले वर्षों में नीतिगत स्थिरता, घरेलू मांग और आर्थिक सुधारों का संयुक्त प्रभाव भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखेगा।
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