बजट 2026 में सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की है, ताकि देश की खनिज आपूर्ति श्रृंखला, प्रोसेसिंग क्षमता और विनिर्माण उद्योग को रणनीतिक मजबूती मिल सके।
भारत में रेयर अर्थ क्रांति की शुरुआत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट भाषण के दौरान भारत की खनिज–आधारित भविष्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की। यह कॉरिडोर देश के लिए न सिर्फ औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि रणनीतिक स्वावलंबन और वैश्विक प्रभुत्व की दृष्टि से भी बेहद अहम कदम है। सरकार का उद्देश्य है कि क्रिटिकल मिनरल्स की श्रृंखला—माइनिंग से लेकर प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण तक—देश में ही विकसित की जाए।
खनिज–समृद्ध राज्यों में नई संभावनाओं का विस्तार
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु लंबे समय से रेयर अर्थ समेत कई रणनीतिक खनिजों के प्रमुख भंडार रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी प्रोसेसिंग क्षमता सीमित रही है। केंद्र सरकार इन राज्यों के साथ साझेदारी करते हुए माइनिंग, प्रोसेसिंग, अनुसंधान, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और विनिर्माण को एकीकृत करने वाले कॉरिडोर विकसित करेगी। इस कदम से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा, बल्कि रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार को भी नया आयाम मिलेगा।
चीन के दबदबे के बीच भारत की रणनीतिक मजबूती
रेयर अर्थ खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन लगभग पूरी तरह चीन नियंत्रित करता है, जिसके पास प्रोसेसिंग क्षमता का 90% से अधिक हिस्सेदारी है। अप्रैल 2025 में चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स और मैग्नेट उत्पादों पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी थी। भारत के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों, डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रेयर अर्थ की मांग तेजी से बढ़ रही है। बजट 2026 में घोषित कॉरिडोर इस निर्भरता को कम करेंगे और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक विश्वसनीय खिलाड़ी बनाएंगे।
भारत का विशाल भंडार, लेकिन उत्पादन न्यूनतम—अब होगी क्षमता का विस्तार
Amicus Growth की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास 6.9 मिलियन टन रेयर अर्थ का भंडार है—जो दुनिया में तीसरे स्थान पर आता है। इसके बावजूद भारत का वैश्विक उत्पादन में योगदान 1% से भी कम है। इस विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में "रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट" स्कीम शुरू की थी, और अब कॉरिडोर की घोषणा इस क्षेत्र में वास्तविक औद्योगिक क्रांति लाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे भारत की कच्चे खनिज से लेकर अंतिम उत्पाद तक की पूरी वैल्यू चेन मजबूत होगी।
घोषणा का बाजार पर प्रभाव—रेयर अर्थ कंपनियाँ फोकस में
बजट का सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिखा। Mishra Dhatu Nigam (MIDHANI) के शेयर में 0.33% की मामूली गिरावट आई, जबकि GMDC के शेयर स्थिर रहे। वहीं, National Aluminium Company (NALCO) के शेयर में 8.28% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में रेयर अर्थ कॉरिडोर नीति घरेलू कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगी और विदेशी निवेश आकर्षित करेगी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर निर्णायक कदम
सरकार का यह कदम भारत को EV सेक्टर, डिफेंस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। कॉरिडोर न केवल खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे, बल्कि भविष्य की इंडस्ट्री को दिशा देने वाले तकनीकी नवाचारों और अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करेंगे। भारत का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में रेयर अर्थ उत्पादन और प्रोसेसिंग में अपनी वैश्विक हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाया जाए।
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