मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान पांच प्रतिशत से मामूली बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही विभिन्न जिंसों की कीमतों में दबाव बढ़ता दिख रहा है। केंद्रीय बैंक की अक्टूबर की द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में महंगाई का परिदृश्य कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून अल नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण आपूर्ति पक्ष से लगातार दबाव की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि तेल के अलावा खाद्य वर्ग में विभिन्न जिंसों की कीमतों में दबाव बढ़ता दिख रहा है।
तिमाही अनुमान और मुख्य महंगाई
मल्होत्रा ने कहा कि इसके अलावा महंगाई के व्यापक होने के शुरुआती संकेत भी मुख्य महंगाई में बढ़ोतरी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के बड़े हिस्से में महंगाई बढ़ने से स्पष्ट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में यह 4.9 प्रतिशत तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई दोनों ओर घट-बढ़ के साथ 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मार्च 2027 में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए मुख्य महंगाई दर 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अगस्त के आंकड़े और खाद्य दबाव
सीपीआई आधारित खुदरा महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई जो जुलाई में 4.5 प्रतिशत थी। इसकी मुख्य वजह खाद्य और ईंधन वर्ग में महंगाई बढ़ना रही। मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी अधिक व्यापक हो गई है और चीनी तथा प्याज जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतों में काफी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि अगस्त में ईंधन महंगाई भी बढ़ी जिसका मुख्य कारण प्रतिकूल आधार प्रभाव रहा। कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई अगस्त में बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई। खाद्य पदार्थों में व्यापक बढ़ोतरी ने महंगाई को प्रभावित किया है।
नीतिगत दर में बढ़ोतरी
गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी ने पाया कि उपलब्ध आंकड़ों के मद्देनजर यह स्पष्ट है कि महंगाई और उसका परिदृश्य पिछले साल की तरह अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में नीतिगत दर को फिर से समायोजित करना जरूरी है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत करने का फैसला किया। एमपीसी ने अपने रुख को तटस्थ से बदलकर सोच-समझकर सख्त करने का कर दिया। महंगाई नियंत्रण के लिए यह कदम आवश्यक माना गया।
आपूर्ति पक्ष की चुनौतियां
कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति ने कृषि उत्पादन पर असर डालने की आशंका पैदा की है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से ईंधन महंगाई बढ़ने का खतरा है। आरबीआई ने इन कारकों को ध्यान में रखते हुए महंगाई अनुमान बढ़ाया है। खाद्य और ईंधन वर्ग में दबाव के कारण महंगाई व्यापक रूप ले रही है। केंद्रीय बैंक आगे की निगरानी जारी रखेगा और आवश्यकतानुसार नीतिगत कदम उठाएगा। महंगाई को नियंत्रित रखना मौद्रिक नीति की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।