भारतीय स्टेट बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के आंकड़े जारी करते हुए एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह देश की बैंकिंग व्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है। दिसंबर तिमाही में बैंक का एकीकृत शुद्ध लाभ 13.06 प्रतिशत बढ़कर 21,317 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो सितंबर तिमाही के 21,137 करोड़ रुपए से अधिक और पिछले साल की समान अवधि के 18,853 करोड़ रुपए की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त है। यह निरंतर वृद्धि न केवल बैंक की परिचालन क्षमता का प्रमाण है बल्कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में ग्राहकों के भरोसे को भी दर्शाती है।
शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय उछाल का संकेत
एकल आधार पर एसबीआई का मुनाफा 24.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 21,028 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 16,891 करोड़ रुपए की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन है। देश की रिटेल और कॉर्पोरेट लेंडिंग दोनों ही शाखाओं में स्थिर वृद्धि ने बैंक को लाभप्रदता के इस स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्याज आय में सुधार के साथ जोखिम प्रबंधन की प्रभावी रणनीति का भी इस पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
आय में स्थिर बढ़त और लागत नियंत्रण
दिसंबर 2025 तिमाही में बैंक की कुल आय बढ़कर 1,40,915 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,28,467 करोड़ रुपए से अधिक है। आय में यह वृद्धि बैंक की लोन बुक के विस्तार और निवेश पोर्टफोलियो में सुधार का परिणाम है। इस दौरान खर्च भी बढ़ा, जो 1,04,917 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,08,052 करोड़ रुपए पर रहा। हालांकि, राजस्व वृद्धि की तेज गति ने खर्च में हुई बढ़ोतरी को संतुलित कर दिया, जिससे मुनाफे पर सकारात्मक असर देखने को मिला।
एनपीए में सुधार से मजबूत हुआ बैंक का स्वास्थ्य
बैंक की संपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) अनुपात सितंबर 2025 के 1.73 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2025 में 1.57 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले कई वर्षों में बैंक के सतत सुधारात्मक प्रयासों का नतीजा है। एनपीए घटने से निवेशकों के बीच बैंक की विश्वसनीयता और मजबूत होती है तथा नए ऋण वितरण में भी सक्षम वातावरण तैयार होता है।
प्रावधान और पूंजी अनुपात ने दी सुरक्षित स्थिति की पुष्टि
कुल प्रावधान बढ़कर 4,507 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 911 करोड़ रुपए था। प्रावधान में हुई यह वृद्धि बैंक के सतर्क वित्तीय रुख और भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी को दर्शाती है। इसके साथ ही पूंजी पर्याप्तता अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक 14.04 प्रतिशत रहा, जो नियामकीय मानकों से काफी बेहतर है और बैंक की स्थिर वित्तीय स्थिति का स्पष्ट संकेत देता है।
आगामी तिमाहियों के लिए सकारात्मक संकेत
एसबीआई के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में स्थिरता और सुनिश्चित विकास की दिशा में यह संस्थान निर्णायक भूमिका निभा रहा है। आय वृद्धि, मुनाफे में तेज उछाल और एनपीए में गिरावट आने से आने वाली तिमाहियों के लिए भी सकारात्मक संकेत मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत उपभोक्ता मांग, तकनीकी विस्तार और व्यापक ऋण वृद्धि से बैंक के प्रदर्शन में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
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