Mumbai | भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को पिछले कारोबारी सत्र की जोरदार तेजी के बाद सुस्त शुरुआत देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 में हल्की गिरावट दर्ज की गई। IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन मिडकैप, स्मॉलकैप और कुछ अन्य सेक्टरों में दबाव बना रहा।
सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ खुला, निफ्टी में हल्की गिरावट
उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स 73,049.76 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 73,033.78 पर बंद हुआ था। इस तरह सेंसेक्स में 15.98 अंकों की मामूली बढ़त रही। वहीं, निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,721.95 के मुकाबले 22,715.75 पर खुला, जो 6.20 अंकों की गिरावट दर्शाता है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई थी। इसके बाद बुधवार को निवेशकों ने नई खरीदारी से पहले घरेलू और वैश्विक संकेतों का आकलन किया।
IT शेयरों में तेजी, मिडकैप और स्मॉलकैप कमजोर
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी IT एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ प्रमुख लाभ वाले सूचकांकों में शामिल रहा। निफ्टी मिडस्मॉल IT एंड टेलीकॉम और निफ्टी FMCG में भी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मीडिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक के शेयर भी शुरुआती कारोबार में हरे निशान में रहे। इसके विपरीत, निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.15 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.33 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.67 प्रतिशत की कमजोरी रही। हेल्थकेयर से जुड़े सूचकांकों और PSU बैंक शेयरों पर भी दबाव दिखाई दिया। निफ्टी 50 में श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और BSE शुरुआती कारोबार के प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहे।
मंगलवार की तेजी के पीछे शॉर्ट कवरिंग की भूमिका
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को निफ्टी में आई तेज तेजी में शॉर्ट कवरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शॉर्ट कवरिंग उस स्थिति को कहते हैं, जब गिरावट की उम्मीद में शेयर बेचने वाले कारोबारी अपनी पोजीशन बंद करने के लिए दोबारा खरीदारी करते हैं। इससे बाजार में अचानक तेजी आ सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर हितधारकों की राय की समीक्षा करने संबंधी टिप्पणी से भी निवेशकों की उम्मीदों को समर्थन मिला। हालांकि, संभावित नीतिगत बदलावों को लेकर किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर निवेशकों की नजर
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
निफ्टी के लिए 22,550 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,550 के आसपास तत्काल सपोर्ट देखा जा रहा है। वहीं, 22,787 से 22,880 का दायरा महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है। इस क्षेत्र के ऊपर निर्णायक बढ़त मिलने पर बाजार में तेजी का रुख मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों की नजर निफ्टी के 23,200 के स्तर की संभावित दिशा पर भी बनी हुई है। हालांकि, यह लक्ष्य बाजार की आगे की चाल, वैश्विक संकेतों और निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगा। सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तर बाजार की संभावित दिशा का संकेत देते हैं, न कि निश्चित परिणाम की गारंटी।
महंगाई के आंकड़ों और तिमाही नतीजों पर रहेगा फोकस
निवेशक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर रखेंगे। महंगाई के आंकड़े अर्थव्यवस्था की स्थिति और कंपनियों की लागत को समझने में मदद कर सकते हैं। वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में आगे कारोबार के दौरान गतिविधि देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल है। IT शेयरों की मजबूती के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव और वैश्विक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार की दिशा, कंपनियों के नतीजों और जोखिम के स्तर को ध्यान में रखकर फैसले लेना महत्वपूर्ण रहेगा।