नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी उथल-पुथल से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। महंगे तेल ने जहां दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका को मजबूत किया है, वहीं एनर्जी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। मंगलवार को एनर्जी शेयरों ने नए रिकॉर्ड स्तर बनाए, जबकि टेक्नोलॉजी समेत बाजार के दूसरे हिस्सों में बिकवाली का दबाव रहा।
Energy Stocks ने बनाया नया रिकॉर्ड
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, S&P 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स 1.8 फीसदी चढ़कर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले मार्च में इंडेक्स ने रिकॉर्ड बनाया था। जुलाई में दबाव में रहे कई एनर्जी शेयर अब अपने निचले स्तर से करीब 21 फीसदी तक ऊपर आ चुके हैं। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा फायदा बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों को मिल रहा है।
Chevron और ExxonMobil के मुनाफे में बड़ा उछाल
दिग्गज तेल कंपनियों Chevron और ExxonMobil के दूसरी तिमाही के प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में Chevron की कमाई में करीब 240 फीसदी, जबकि ExxonMobil के मुनाफे में 115 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिफाइनरी कंपनियों को भी सप्लाई संकट और ऊंची तेल कीमतों का फायदा मिल रहा है। कई कंपनियां मजबूत मार्जिन के चलते बेहतर मुनाफा दर्ज कर रही हैं।
युद्ध लंबा चला तो तेल और महंगा होने का डर
कुछ समय पहले निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द कोई कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। इसी उम्मीद के कारण तेल कंपनियों के शेयरों में कमजोरी आई थी। हालांकि, अब बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि मध्य पूर्व का तनाव लंबे समय तक जारी रह सकता है। टोरटॉयज कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल के मुताबिक, कई निवेशक पहले एनर्जी शेयरों में आई तेजी का फायदा नहीं उठा पाए थे। अब वे इस तेजी को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। बाजार को आशंका है कि अगर मध्य पूर्व में सप्लाई बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
महंगे तेल से महंगाई का खतरा
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी सिर्फ एनर्जी कंपनियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। महंगा तेल ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ाता है, जिसका असर आगे चलकर आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई फिर से बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसी चिंता के चलते मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली देखने को मिली। S&P 500 में 0.7 फीसदी और Nasdaq में 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
Nvidia और Intel समेत टेक शेयरों पर दबाव
महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता का असर टेक शेयरों पर भी पड़ा। Nvidia और Intel जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। वहीं, अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.70 फीसदी से ऊपर चली गई। यह जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।
यूरोपीय बाजारों में भी दबाव
अमेरिका के साथ यूरोपीय शेयर बाजारों में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। हालांकि, लंदन का FTSE 100 अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा। इसकी एक बड़ी वजह इंडेक्स में BP और Shell जैसी बड़ी एनर्जी कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन है। कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने ग्लोबल मार्केट के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों और मध्य पूर्व की स्थिति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।