देश के शीर्ष अस्पतालों में शामिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान इस समय फैकल्टी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा देश की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भाजपा सरकार पूरी तरह असंवेदनशील है। प्राथमिक और जिला लेवल के अस्पतालों की बात छोड़ भी दें तो भी देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ही डॉक्टरों की ज़बरदस्त कमी है।
11 एम्स अस्पतालों में 4,099 स्वीकृत फ़ैकल्टी पदों में से 1,600 पद ख़ाली पड़े
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ देश के 11 एम्स अस्पतालों में 4,099 स्वीकृत फ़ैकल्टी पदों में से 1,600 पद ख़ाली पड़े हैं। इसका अर्थ हुआ कि एम्स में जितने डॉक्टर होने चाहिए उसमें से 39% डॉक्टर कम हैं।यह सर्वविदित तथ्य है कि गंभीर बीमारियों के लिए देश का आम नागरिक अलग-अलग एम्स अस्पतालों में उपचार के लिए जाता है। गंभीर बीमारियों का उपचार इतना महँगा है कि आम आदमी निजी अस्पतालों में जाकर इलाज नहीं करा सकता।
तत्काल सभी पदों पर भर्तियां की जाएं
बड़े पैमाने पर पदों के ख़ाली होने के साथ ही बहुत से एम्स में जाँच की मशीनों और ज़रूरी दवाओं की भी पूरी उपलब्धता नहीं है।मैं माँग करता हूँ कि देश की जनता के हित में एम्स जैसे महत्वपूर्ण अस्पतालों में तत्काल सभी पदों पर भर्तियां की जाएं और मरीज़ों के बेहतर उपचार के लिए जितनी मशीनों और दवाओं की आवश्यकता है, उन्हें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराया जाए।
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