Reservation Amendment Bill: आरक्षण संशोधन बिल को पारित हुए महीने भर बीत जाने के बावजूद इस पर राज्यपाल द्वारा दस्तखत नहीं किए जाने को लेकर सियासी बवाल जारी है। कांग्रेस ने राजधानी रायपुर में अब तक राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए जाने के विरोध में जन अधिकार महारैली का आयोजन किया। इसमें ST, SC और ओबीसी से जुड़े सभी समाजों के प्रमुखों को जोड़ने का प्रयास किया। आरक्षण संशोधन विधेयक में विलंब को भाजपा का षड्यंत्र बताया। वहीं भाजपा ने इसे राजभवन का अपमान बताया।
आरक्षण विधेयक राजभवन भेजा गया था
दरअसल, 2 दिसंबर को विधानसभा से आरक्षण विधेयक राजभवन भेजा गया था, अब तक राज्यपाल ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसी का विरोध जताने कांग्रेस ने जन अधिकार रैली आयोजित की है। रायपुर साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित इस जन अधिकार रैली में प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम, मंत्री टीएस सिंहदेव समेत सभी मंत्री, विधायक, संसदीय सचिव समेत सभी बड़े नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।
भाजपा का साफ षड्यंत्र लग रहा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि जन अधिकार महारैली में प्रदेश भर से सर्वसमाज के एक लाख से अधिक लोग आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी राजभवन की आड़ में राजनीति कर रही है। आरक्षण संशोधन विधेयक में विलंब भाजपा का साफ षड्यंत्र लग रहा है।
संविधान का पालन नहीं हो रहा
सीएम भूपेश बघेल ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि संविधान का पालन नहीं हो रहा है इसलिए यह रैली की जा रही है। बीजेपी ने राजभवन को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। एक महीने से ज्यादा वक्त हो गया। साल और महीने सब बदल गया। राजभवन अपने अधिकार से बाहर जाकर काम कर रहा है। बीजेपी आरक्षण के विरोधी है। राजभवन के द्वारा रोकने का प्रयास किया जा रहा है। क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार लोगों को नौकरी देना चाहती है। कांग्रेस हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा के माध्यम से आरक्षण का मुद्दा भी लेकर लोगों के बीच जाएगी। सरकार न डरेगी न झुकेगी। आरक्षण का मुद्दा भी हमारी सरकार जीतेगी।
मोहन मरकाम ने कहा
कांग्रेस की इस रैली में 70 से अधिक समाजों के लोगों के शामिल होने का दावा किया। कांग्रेस ने इसे लेकर सभी समाज के लोगों से रैली में आने की बात की है। मोहन मरकाम ने कहा है कि कांग्रेस सरकार को सर्व समाज को आरक्षण देने का राजनैतिक रूप से श्रेय नहीं मिले इसलिए भाजपा राजभवन में आरक्षण बिल पर हस्ताक्षर नहीं होने दे रही है।
हस्ताक्षर करने के लिए ज्ञापन भी सौंपा
रैली के बाद कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाकर बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए ज्ञापन भी सौंपा। इधर आरक्षण का मामला विधानसभा में दूसरे दिन भी जोर शोर से उठा। आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं सत्तापक्ष ने विपक्ष पर आरक्षण को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
गवर्नर को कानून सम्मत प्रश्न पूछने का अधिकार
आरक्षण बिल को लेकर पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा, सरकार यह बताने में असफल है कि क्वांटिफाइबल डाटा आयोग के आंकड़े सदन में क्यों पेश नहीं किए गए। वही सर्वोच्च सदन को अपमानित करने का काम कांग्रेस की सरकार कर रही है। गवर्नर को कानून सम्मत प्रश्न पूछने का अधिकार है। जिस प्रकार रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है, यह इतिहास में पहली बार है कि सत्ता पक्ष के लोग इस तरह आंदोलन में लगे हुए हैं।
महारैली का राजभवन पर कितना असर पड़ता है
बहरहाल, देखना होगा कि कांग्रेस की इस महारैली का राजभवन पर कितना असर पड़ता है। क्या राज्यपाल आरक्षण संशोधन बिल पर हस्ताक्षर कर इस मामले का पटाक्षेप करती है या फिर कांग्रेस को और आंदोलन कर 2023 के चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने का अवसर प्रदान करती है?
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