मध्य प्रदेश के सीधी जिले में नायब तहसीलदार वाल्मिक प्रसाद साकेत को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा है। यह घटना शनिवार, 21 तारीख को मझौली तहसील में हुई। शिकायतकर्ता प्रवेश कुमार शुक्ला की जमीन के नामांतरण के लिए साकेत ने 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त की 12 सदस्यीय टीम ने पहली किश्त लेते हुए साकेत को उनके सरकारी आवास में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई लोकायुक्त संभाग रीवा के पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है।
जमीन नामांतरण से जुड़ा है मामला
मामला जमीन के नामांतरण से जुड़ा है। सीधी जिले के सरेहा गांव के रहने वाले प्रवेश कुमार शुक्ला ने अपने परिवार की जमीन के नामांतरण के लिए आवेदन किया था। नायब तहसीलदार वाल्मिक प्रसाद साकेत ने इसके लिए उनसे 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी। शुक्ला ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की। लोकायुक्त संभाग रीवा के पुलिस अधीक्षक ने शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान साकेत ने शुक्ला से 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया जाल
इसके बाद लोकायुक्त ने एक जाल बिछाया। शनिवार को शुक्ला 25,000 रुपये लेकर साकेत के सरकारी आवास पर गए। जैसे ही साकेत ने रिश्वत की रकम ली, लोकायुक्त की टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के समय साकेत के चेहरे का रंग उड़ गया था।
12 लोगों की टीम ने किया ऑपरेशन
इस कार्रवाई को लोकायुक्त संभाग रीवा की 12 सदस्यीय टीम ने अंजाम दिया। टीम का नेतृत्व कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र कुमार ने किया। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है। प्रसाद ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस गिरफ्तारी से पूरे प्रशासन में हलचल मच गई है। मामले की जांच जारी है।
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