भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सामने अपनी हाइपरसोनिक ताकत का प्रदर्शन किया है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) की हैदराबाद स्थित प्रमुख प्रयोगशाला डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास की दिशा में बड़ी सफलता दर्ज की है।
हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
DRDO ने स्क्रैमजेट कंबस्टर का लंबी अवधि का सफल जमीनी परीक्षण कर लिया है। यह परीक्षण हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के विकास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जो अत्याधुनिक हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पर तेज़ी से काम कर रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने दी यह जानकारी
रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि हैदराबाद स्थित DRDL ने स्क्रैमजेट-संचालित हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। मंत्रालय के अनुसार, यह तकनीक भविष्य की हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
जानें विशेषज्ञों ने क्या कहा...
विशेषज्ञों का मानना है कि, स्क्रैमजेट तकनीक की मदद से मिसाइलें मैक-5 (ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक) या उससे भी ज्यादा रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वातावरण की ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है और रेंज व गति दोनों में इजाफा होता है।
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