मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में किसान अनिल वर्मा के प्रयासों ने खेती की दुनिया में एक नई दिशा प्रदान की है। गहरे बैंगनी-काले रंग का यह टमाटर देखने में जितना आकर्षक है, उतना ही लाभदायक भी साबित हो रहा है। विदेशों में लोकप्रिय यह किस्म भारत में अभी प्रयोगात्मक स्तर पर है, लेकिन अनिल वर्मा ने इसे सफलतापूर्वक उगाकर साबित कर दिया है कि नवाचार अपनाने वाले किसान समय के साथ न केवल तालमेल बैठा सकते हैं बल्कि कृषि को लाभकारी व्यवसाय में भी बदल सकते हैं।
विदेशी बीज, ऊंची कीमत और बेहतर उत्पादन
अनिल वर्मा ने काले टमाटर के बीज विदेश से मंगवाए, जिनकी कीमत लगभग 3000 रुपए में 60–70 दानों के बीच थी। बीज भले ही महंगे हों, लेकिन फसल की बाजार कीमत इसकी लागत को आसानी से कवर कर देती है। वर्तमान में काले टमाटर की कीमत बाजार में करीब एक हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच रही है, जिससे यह किसानों के लिए एक अत्यधिक लाभकारी फसल बन गई है। अनिल वर्मा के खेतों में उगने वाला एक काला टमाटर औसतन 350 से 400 ग्राम का होता है, जो सामान्य लाल टमाटर की तुलना में आकार और वजन में कहीं अधिक बड़ा है।
स्वाद, पोषण और बाजार मांग ने बढ़ाई लोकप्रियता
काले टमाटर का स्वाद हल्का मीठा और सामान्य टमाटर की तुलना में कम खट्टा होता है, जिससे यह होटल, रेस्तरां और हेल्थ फूड बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसका विशिष्ट रंग और आकर्षक बनावट इसे सलाद, सूप और विशेष व्यंजनों के लिए प्रीमियम विकल्प बनाते हैं। विदेशी बाजारों में इसे ‘सुपरफूड’ की श्रेणी प्राप्त है और भारत में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं और प्रीमियम उत्पादों की तलाश करने वाले बाजारों में इसकी कीमत और लोकप्रियता लगातार ऊपर जा रही है।
सुपरफूड क्यों है काला टमाटर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार काले टमाटर में विटामिन ए, सी और के की उच्च मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा इसमें एंथोसायनिन और लाइकोपीन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो हृदय रोग, कैंसर, सूजन और आंखों से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मदद करते हैं। एंथोसायनिन वही तत्व है जो ब्लूबेरी और ब्लैक ग्रेप्स जैसे सुपरफूड्स को गहरा नीला या बैंगनी रंग देता है। यही वजह है कि काला टमाटर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
किसानों के लिए भविष्य की हाई-वैल्यू फसल
अनिल वर्मा का मानना है कि काला टमाटर कम क्षेत्र में अधिक लाभ देने वाली फसल है और आने वाले समय में यह किसानों के लिए भविष्य की खेती का एक मजबूत विकल्प बन सकती है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और पारंपरिक खेती में घटती आमदनी ने किसानों को नई संभावनाओं की तलाश में लगाया है। ऐसे समय में काला टमाटर जैसी हाई-वैल्यू फसलें खेती में पुनः लाभ की संभावना बढ़ा सकती हैं। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि वैज्ञानिक पद्धति से काले टमाटर की खेती को बढ़ावा दिया जाए तो बैतूल जैसे जिले इस फसल की वजह से एक नई पहचान बना सकते हैं।
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