रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आज राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों को पूरी तरह विफल बताया। इस दौरान प्रदेश महामंत्री मलकीत गेदु भी मौजूद रहे। पीसी में धान खरीदी, राजिम हिंसा और केंद्र के बजट को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया।
धान खरीदी को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार की नीतियों से किसान बुरी तरह परेशान हैं। सरकार ने 165 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य घोषित किया था, लेकिन पिछले साल की तुलना में 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम धान खरीदा गया। कई किसानों का पंजीयन तो हुआ, लेकिन उन्हें टोकन तक नहीं दिया गया।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के खिलाफ लगातार षड्यंत्र कर रही है। 29 जिलों में धान खरीदी कम हुई, और सरकार ने कम खरीदी को लेकर जश्न तक मना लिया। बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों से सरकार को माफी मांगनी चाहिए।
राजिम हिंसा मामले पर बोलते हुए पीसीसी चीफ ने कहा कि कई ग्रामीणों के घायल होने की जानकारी है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार इस सच्चाई को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कवर्धा में ग्रामीणों के घर जलाए जाने और बलौदाबाजार में कलेक्टर-एसपी कार्यालय जलने का भी ज़िक्र किया। दीपक बैज ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ में ऐसा लॉ एंड ऑर्डर क्यों बन गया है? सरकार भगवान भरोसे चल रही है। कांग्रेस ने दोनों पक्षों से शांति की अपील करते हुए राजिम हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की है।
बीजेपी द्वारा राजिम हिंसा को राजनीतिक षड्यंत्र बताने पर पलटवार करते हुए दीपक बैज ने कहा कि इस घटना के पीछे राजनीतिक साज़िश हो सकती है और इसमें बीजेपी का भी हाथ हो सकता है। कांग्रेस इस पूरे मामले में न्यायिक जांच की मांग पर कायम है।
वहीं बजट 2026 को लेकर भी पीसीसी चीफ ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बार भी छत्तीसगढ़ को बजट में ठगा गया है। माइनिंग का विशेष कॉरिडोर बनाकर चहेते उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया गया है। दीपक बैज का आरोप है कि यह बजट पूरी तरह से छत्तीसगढ़ की उपेक्षा करने वाला है। इतना ही नहीं, पीसीसी चीफ ने ऐप्सटीन फाइल्स को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि इन फाइल्स में पीएम मोदी का नाम सामने आया है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर चुप क्यों है? सरकार को देश को जवाब देना चाहिए।
धर्मांतरण के मुद्दे पर दीपक बैज ने कहा कि यह सरकार की नाकामी है कि वह धर्मांतरण के मामलों को रोक नहीं पा रही है। दो साल बीत जाने के बावजूद सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं ला पाई है।
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