रायपुर। छत्तीसगढ़ सहित देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। प्रदेश में SIR के पहले चरण के पूरा होते ही कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा उछाल दिया है।
27 लाख नाम हटने के बाद कांग्रेस हमलावर
प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 2.12 करोड़ है। SIR के प्रारंभिक ड्राफ्ट के अनुसार लगभग 27 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग के मुताबिक सत्यापन के दौरान ये नाम मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या पते पर अनुपलब्ध पाए गए। वहीं 6,40,145 मतदाता ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में आए हैं, यानी सत्यापन के दौरान वे दर्ज पते पर नहीं मिले।
नाम कटने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए विरोध तेज कर दिया है। राजधानी रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फॉर्म-7 के जरिए चुनिंदा लोगों के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
धनेंद्र साहू का सरकार पर आरोप
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि कई मामलों में जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर नाम काट दिए गए। उन्होंने भाजपा से सवाल पूछा कि बिहार में SIR के बाद चुनाव हुए, वहां कितने घुसपैठिए और कितने रोहिंग्या पाए गए, सरकार इसका जवाब दे। साथ ही छत्तीसगढ़ में कथित घुसपैठियों की संख्या सार्वजनिक करने की मांग भी की।
भाजपा का पलटवार, रोहिंग्या मुद्दा केंद्र में
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस को सीधे तौर पर रोहिंग्या मुसलमानों का रहनुमा करार दे दिया। उन्होंने कहा कि रोहिंग्याओं के नाम कटने से कांग्रेस को पीड़ा हो रही है। मंत्री का कहना है कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि अवैध वोटरों को सूची से बाहर किया जाएगा और रोहिंग्या मुसलमानों को देश में रहने नहीं दिया जाएगा।
SIR प्रक्रिया का शेड्यूल
- 4 नवंबर 2025: SIR प्रक्रिया की शुरुआत
- 23 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन
- 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026: दावा-आपत्ति अवधि
- 21 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की योजना
- ड्राफ्ट SIR रोल के अनुसार करीब 1.85 करोड़ मतदाताओं के नामों का प्रारंभिक प्रकाशन किया गया है, जबकि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अभी जारी है।
बड़ा सवाल
छत्तीसगढ़ में SIR के तहत अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां नाम काटे जाने को लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा कटे नामों को रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों से जोड़ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि ये नाम वास्तव में अवैध थे, तो अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर कार्रवाई हुई है, तो राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आमने-सामने क्यों हैं?
Comments (0)