केंद्रीय बजट पेश होते ही कांग्रेस ने तीखे स्वर में सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पीसीसी प्रमुख जीतू पटवारी और कांग्रेस नेताओं ने इस बजट को दिशाहीन, जनविरोधी और सिर्फ सूट-बूट वालों का बजट बताया। उनके अनुसार बजट में किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, ओबीसी और मध्यम वर्ग के लिए न तो कोई दृष्टि है और न ही राहत।
दिशाहीन बजट का आरोप
कमलनाथ ने X पर लिखते हुए कहा कि बजट में न कोई स्पष्ट दिशा है, न भविष्य का विज़न। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत की उम्मीद थी, युवाओं को रोजगार की, महिलाओं और कमजोर वर्गों को सशक्तिकरण की—लेकिन बजट में इन सभी को नजरअंदाज कर दिया गया। मध्यम वर्ग को आयकर में राहत की प्रतीक्षा थी, जो एक बार फिर पूरी नहीं हुई। कांग्रेस के अनुसार यह सरकार लगातार आम लोगों को बोझ तले दबाती जा रही है।
मध्यप्रदेश की अनदेखी पर नाराज़गी
कमलनाथ ने यह भी कहा कि केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया। न बड़े नए प्रोजेक्ट आए, न रोजगार संवर्धन और औद्योगिक विकास के लिए कोई साफ रोडमैप दिया गया। उनके अनुसार यह प्रदेश की आकांक्षाओं के साथ अन्याय है।
जीतू पटवारी का सीधा हमला: ‘सूट-बूट की सरकार’
पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह बजट उस बात का फिर से प्रमाण है कि सरकार उद्योगपतियों के हितों में अधिक रुचि रखती है। उन्होंने कहा कि छात्रों में अब बेरोजगारी, पेपर लीक और 2 करोड़ नौकरियों के वादे पर असंतोष बढ़ रहा है। इसलिए सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए नए विवाद पैदा कर रही है।
युवाओं और छात्रों के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि युवाओं के लिए न ठोस रोजगार नीति लाई गई, न शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कोई बड़ा कदम उठाया गया। पटवारी ने कहा कि छात्रों की आवाजें उठने लगी हैं और सरकार उस असंतोष को दबाने के लिए नई रणनीति बना रही है।
विभाजनकारी राजनीति का आरोप
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार देश में हिंदू–मुस्लिम और जातीय ध्रुवीकरण को बढ़ावा देकर जनमानस को बांटने की कोशिश कर रही है, ताकि असली मुद्दे—मूल्यवृद्धि, बेरोजगारी, गरीबी—चर्चा में न आएँ। उनके अनुसार यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है।
कांग्रेस का निष्कर्ष: जनता की उम्मीदों को झटका
कांग्रेस के मुताबिक बजट ने आम नागरिकों, मजदूरों, किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग को निराश किया है। सरकार अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दिखा चुकी है—आम जनता नहीं, चंद चुनिंदा लोग ही इस बजट के वास्तविक लाभार्थी होंगे।
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