तपोभूमि के नाम से विख्यात व शिव भक्त प्रातः स्मरणीया मातुश्री अहिल्या की कर्म स्थली रही महेश्वर नगरी में भगवान महामृत्युंजय की रथ यात्रा श्रद्धा भक्ति उमंग उत्साह के साथ निकली, जिसमें पूरे रास्ते शिव भक्त भजनों पर झूमते नाचते व बाबा का जयकारा लगाते हुए भाव विभोर हो भगवान मृत्युंजय के रथ को खींचते आगे बढ़ते रहे। भक्ति का यह नजारा सभी नगरवाशियों को आनंदित करते रहा।
बैंड बाजे ढोल ताशे से सजी धर्म ध्वजा लहराती निकलने वाली महामृत्युंजय रथ यात्रा अपनी भव्यता की मिसाल बन गई है। सनातन संस्कृति की ध्वजा को फहराते सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के उद्देश्य से निकलने वाली महामृत्युंजय रथ यात्रा का यह 19 वर्ष है। महामृत्युंजय रथ यात्रा के प्रमुख स्वर्गीय डाक्टर मनस्वी जी व उनके साथियों की अथक मेहनत से इस रथ यात्रा ने विशाल रूप लेते हुए भक्त और भक्ति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। महामृत्युंजय रथ यात्रा का भक्तों ने जोरदार स्वागत पुष्प वर्षा करते हुए किया। कदम-कदम पर भक्तजन भगवान मृत्युंजय के दर्शन को लालायित होकर पुष्प वर्षा करते रहे। कई जगहों पर मंच लगाकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रथ यात्रा का स्वागत किया।
महेश्वर, महामृत्युंजय रथ यात्रा नगर भ्रमण करते हुए गोधूलि बेला में नर्मदा के पावन तट पर पहुंची। पूरे रास्ते शिव भक्त आनंदित होकर जय घोष करते हुए भगवान मृत्युंजय के रथ को खींचते हुए नर्मदा तट पहुंचे।
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