शासकीय विभागों में भी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में समय की बचत, कार्य की उत्पादकता बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारी-कर्मचारियों को एआई टूल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग बैचों में शासकीय विभागों में कार्यरत अफसरों, बाबुओं और कर्मचारियों को एआई तकनीक की जानकारी दी जा रही है। डिजिटल इंडिया की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सरकारी विभागों में भी एआई से होगा कामकाज
उल्लेखनीय है कि तकनीकी युग में सरकारी विभागों की कार्यशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है। शासकीय विभाग भी अब हाईटेक हो रहे हैं। एआई तकनीक की चर्चा पूरी दुनिया में है। अब तक इसका उपयोग निजी संस्थानों में अधिक देखा जा रहा था, लेकिन अब जिले के सरकारी विभागों में भी एआई के माध्यम से कामकाज किया जाएगा। इसके लिए जिला मुख्यालय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ई-दक्ष केंद्र में ई-गवर्नेंस के माध्यम से अधिकारी-कर्मचारियों को एआई टूल्स में दक्ष बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्पादकता बढ़ाना है मुख्य उद्देश्य
हेड ट्रेनर अभिनव मोदी ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शासकीय विभागों में कार्य-उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि पत्र, ई-मेल, नोटशीट, फोटो और वीडियो की ड्राफ्टिंग के जरिए समय की बचत कैसे की जा सकती है, इसकी प्रैक्टिस कर्मचारियों को कराई जा रही है। प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों को तकनीकी कार्यों के लिए अधीनस्थ स्टाफ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे कम समय में बेहतर और प्रभावी कार्य संभव हो सकेगा।
एक हजार कर्मचारियों को मिल चुका है प्रशिक्षण
जनवरी 2026 से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। ट्रेनर बबिन मिश्रा ने बताया कि अब तक जिले में एक हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगामी पांच महीनों में करीब पांच हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान पहले प्रतिभागियों को एआई तकनीक से परिचित कराया जाता है, इसके बाद उसके सही और व्यावहारिक उपयोग का अभ्यास कराया जाता है।
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