मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को सुदृढ़ करते हुए हरियाखेड़ी ग्राम में वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज के मध्य हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना का विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 1133.67 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जा रही यह परियोजना उज्जैन शहर को शुद्ध, सुरक्षित एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। मुख्यमंत्री की मंशानुरूप परियोजना के अंतर्गत आधुनिक तकनीक से युक्त नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी तथा जर्जर हो चुकी पुरानी पाइपलाइनों को हटाकर नवीन पाइपलाइन से प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे जल अपव्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
सिंहस्थ और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना
हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना को इस प्रकार तैयार किया गया है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के साथ-साथ आयोजन के बाद भी उज्जैन शहर की जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। यह परियोजना वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल समाधान प्रदान करेगी।
चार प्रमुख स्रोतों से सुनिश्चित होगी निर्बाध जल आपूर्ति
इस परियोजना के अंतर्गत सेलारखेड़ी, गंभीर, उंडासा एवं साहिबखेड़ी को मुख्य जल स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा। इन जल स्रोतों के समन्वित उपयोग से शहर और मेला क्षेत्र में जल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे आपात स्थितियों में भी जल संकट की संभावना न्यूनतम रहेगी।
1133.67 करोड़ की लागत, 24 माह में पूर्णता का लक्ष्य
हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1133.67 करोड़ रुपये है। परियोजना को 24 माह की निर्धारित समय-सीमा में चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पूर्व जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ हो सके।
आधुनिक इंटेक वेल और जल शोधन संयंत्रों का निर्माण
परियोजना के अंतर्गत हरियाखेड़ी एवं गंभीर क्षेत्र में दो नए इंटेक वेल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही अंबोदिया, गौघाट एवं हरियाखेड़ी में नए जल शोधन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 250 एमएलडी होगी। इन नवीन संयंत्रों के माध्यम से वर्तमान में संचालित सात जल शोधन संयंत्रों को भी उन्नत और मजबूत किया जाएगा। विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क और नए ओवरहेड टैंक
शहर की जल वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए 600 से 3000 किलोलीटर क्षमता के 17 नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे। इसके साथ लगभग 708 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसमें 534 किलोमीटर लंबा नया वितरण नेटवर्क शामिल होगा। पुरानी एसीपी पाइपलाइनों को बदलने से जल रिसाव में कमी आएगी और आपूर्ति प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।
हजारों परिवारों तक पहुंचेगा शुद्ध पेयजल
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से 49,087 नए घरेलू जल सेवा कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। इससे बड़ी संख्या में परिवारों को पहली बार नियमित और शुद्ध पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर में सुधार होगा।
क्लियर और रॉ वॉटर पाइपलाइन से मजबूत होगी आपूर्ति व्यवस्था
परियोजना के अंतर्गत शुद्ध पानी के लिए 150 से 800 मिलीमीटर व्यास की लगभग 136 किलोमीटर लंबी क्लियर वॉटर पाइपलाइन बिछाई जाएगी। वहीं कच्चे पानी की आपूर्ति के लिए 900 से 1300 मिलीमीटर व्यास की लगभग 39.75 किलोमीटर लंबी रॉ वॉटर पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा, जिससे जल शोधन एवं वितरण की प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित होगी।
करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते शुरू की गई योजना
सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन शहर की प्रभावी जनसंख्या लगभग 9.65 लाख तथा मेला क्षेत्र की अस्थायी जनसंख्या लगभग 21.83 लाख अनुमानित है। विशेष स्नान पर्वों पर एक ही दिन में लगभग 228 लाख श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
आसपास के 20 ग्राम भी योजना में शामिल
उज्जैन के निकट स्थित लगभग 20 ग्रामों को भी इस परियोजना में सम्मिलित किया गया है। ये ग्राम नगरीय विस्तार क्षेत्र में स्थित हैं और भविष्य में जल मांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे क्षेत्रीय संतुलित विकास को बल मिलेगा।
2055 तक उज्जैन की जल जरूरतों का स्थायी समाधान
हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना सिंहस्थ 2028 के सफल आयोजन के साथ-साथ वर्ष 2055 तक उज्जैन शहर की जल आपूर्ति आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगी। यह परियोजना जल सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और नगरीय जीवन की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।
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