नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने केरवा डेम के फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में हुए अवैध भराव और अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि डेम क्षेत्र में हर महीने दो बार नियमित निरीक्षण किया जाए और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
FTL की होगी स्पष्ट मार्किंग
NGT ने केरवा डेम के FTL की स्पष्ट सीमांकन (मार्किंग) करने और उसके प्रभाव क्षेत्र यानी जोन ऑफ इन्फ्लुएंस तय करने के आदेश दिए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन और स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निजी भूमि को नहीं मिलेगी छूट
ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि FTL और बफर जोन में आने वाली निजी भूमि को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। डेम के FTL से 33 मीटर के दायरे में किया गया मिट्टी और निर्माण सामग्री का भराव हटाना अनिवार्य होगा।
2000 डंपर भराव पर स्वतः संज्ञान
पिछले वर्ष केरवा डेम क्षेत्र में करीब 2000 डंपर मिट्टी और निर्माण सामग्री डाले जाने की खबरों पर NGT ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की थी। इसके बाद जांच के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया।
वेटलैंड अथॉरिटी तय करेगी प्रभाव क्षेत्र
स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को डेम के जोन ऑफ इन्फ्लुएंस का निर्धारण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें FTL के साथ-साथ कैचमेंट एरिया, नदियों और नालों को भी शामिल किया जाएगा। इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी।
वेटलैंड का पर्यावरणीय महत्व
- वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह कार्य करते हैं।
- ये बाढ़ नियंत्रण, भूजल रिचार्ज और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।
केरवा डेम का महत्व
- केरवा-कलियासोत वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से संवेदनशील है।
- केरवा डेम से कोलार क्षेत्र को प्रतिदिन लगभग 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है, जिससे यह डेम पर्यावरण और जलापूर्ति दोनों के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण है।
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