फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार तड़के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर भोर से ही भक्तों की भीड़ से खचाखच भरा हुआ था। बाबा महाकाल के दिव्य भस्म आरती दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही कतारों में जुटने लगे। ठीक प्रातः चार बजे जब भगवान को जागृत कर भस्म अर्पण की प्रक्रिया आरंभ हुई, तो पूरा परिसर जय श्री महाकाल के गगनभेदी उद्घोषों से गूंज उठा। भक्तों ने इस पावन क्षण को स्वयं के जीवन का सौभाग्य बताया।
अनुष्ठानों की पवित्र श्रृंखला, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक
मंदिर के पुजारी ने बताया कि भस्म आरती से पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन-वंदन किया गया। परंपरा के अनुसार वीरभद्र जी की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए और तत्पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रसों से विस्तृत अभिषेक कर पुजारियों ने प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया। इस संपूर्ण अनुष्ठान के दौरान वातावरण मंत्रोच्चारों और सुगंधित धूप से अलौकिक बना रहा।
श्री राम के स्वरूप में आकर्षक शृंगार, मस्तक पर ‘राम नाम’ का बेलपत्र
आज की भस्म आरती की विशेषता यह थी कि बाबा महाकाल को श्री राम के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर विशेष ‘राम नाम’ अंकित बेलपत्र अर्पित किया गया, जिससे उनका सौम्य और दिव्य तेज और अधिक प्रखर दिखाई दिया। पुजारियों ने भस्म रमाकर उनका अलौकिक श्रृंगार किया, भांग से लेपित स्वरूप पर चंदन, पुष्प और प्राकृतिक सुगंधित सामग्रियों से नयनाभिराम अलंकरण किया गया। कपूर आरती के पश्चात उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिसने दर्शनों की अनुपम छटा को और भी उज्ज्वल बना दिया।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण, ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा दरबार
शृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। जैसे ही भस्म अर्पण का क्षण आया, झांझ, मंजीरे, शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की संयुक्त ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद ही महाकाल निराकार से साकार होकर विशिष्ट रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिव्यता ने उपस्थित हर साधक को भाव-विभोर कर दिया।
भक्तों का उमड़ा सैलाब, दर्शन के लिए पूरी रात जागरण
दर्शन के लिए आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ क्षण को अपने जीवन की अनमोल आध्यात्मिक अनुभूति बताया। बड़ी संख्या में भक्त रातभर जागकर लाइन में खड़े रहे, ताकि उन्हें सुबह की भस्म आरती में श्री राम-स्वरूप महाकाल के दर्शन मिल सकें। जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, श्रद्धालुओं में उमंग और भक्ति का प्रवाह दिखाई दिया। जय श्री महाकाल और जय श्री राम के संयुक्त जयघोषों ने पूरे महाकाल लोक को उत्सवमय कर दिया।
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