मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास शहरी योजना के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में 10 लाख किफायती आवास बनाए जाएंगे। राज्य सरकार इसके लिए नई किफायती आवास नीति तैयार कर रही है, जिसमें निजी बिल्डरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि हितग्राहियों को सस्ते घर मिल सकें और बिल्डरों को भी आर्थिक नुकसान न हो।
30 दिन में नीति का अंतिम प्रारूप
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में किफायती आवास की चुनौतियों और रणनीतियों पर कार्यशाला आयोजित की। नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल को 30 दिनों के भीतर नीति का अंतिम ड्राफ्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
55 लाख प्रॉपर्टी आईडी डेटा का होगा उपयोग
विभाग के पास उपलब्ध लगभग 55 लाख प्रॉपर्टी आईडी के विशाल डेटा बेस का उपयोग कर साक्ष्य-आधारित और मजबूत हाउसिंग पॉलिसी तैयार की जाएगी। आईटी टूल्स के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई जाएगी। क्रेडाई जैसे संगठनों के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
पर्यावरण, ऊर्जा और ग्रीन रेटिंग पर जोर
प्रस्तुतीकरण में पर्यावरण संतुलन, सामाजिक स्थिरता और शहरी निकायों की भूमिका पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने ऊर्जा दक्ष आवास, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, ग्रीन रेटिंग सिस्टम और संपूर्ण आवासीय सुविधाओं के विकास पर बल दिया। आवास आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर भी सुझाव दिए गए।
सब्सिडी और क्रॉस-सब्सिडी मॉडल से बनेगा संतुलन
योजना के तहत किफायती आवास निर्माण के लिए बिल्डरों को भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। एक फ्लैट की अनुमानित लागत 10 लाख रुपये,केंद्र व राज्य सरकार की सब्सिडी 2.5 लाख रुपये,कम ब्याज दर पर बैंक ऋण 2 लाख रुपये शेष राशि क्रॉस-सब्सिडी मॉडल के जरिए लोग भर सकेंगे,बिल्डर बाजार दर पर फ्लैट और दुकानों की बिक्री से होने वाले लाभ से शेष लागत की पूर्ति करेंगे।
हितग्राहियों को सस्ते घर, बिल्डरों को भी फायदा
सरकार का उद्देश्य है कि मध्यम और निम्न आय वर्ग को किफायती दर पर पक्का आवास मिले, साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी से बड़े पैमाने पर आवास निर्माण संभव हो सके। नई नीति से शहरी क्षेत्रों में आवास संकट कम होने की उम्मीद है।
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