वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार नई पहल करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश में बाघ मित्र, चीता मित्र और हाथी मित्र की नियुक्ति की जाएगी। ये मित्र जंगलों और उनसे लगे क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को जागरूक करने का कार्य करेंगे। सरकार की योजना के अनुसार जंगल के भीतर और आसपास रहने वाले स्थानीय ग्रामीण व आदिवासी युवाओं को पांच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा। हर वर्ष उनके कार्य और प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी तथा बेहतर काम करने वालों की सेवा अवधि बढ़ाई जा सकेगी। इस दौरान उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा।
अच्छा प्रदर्शन करने वाले बनेंगे वन रक्षक
नियुक्त किए गए कुल बाघ मित्र, चीता मित्र और हाथी मित्रों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 30 प्रतिशत युवाओं को आगे चलकर वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के पद पर नियुक्त करने की तैयारी है। इसमें विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के तहत हर साल 500 से अधिक भर्तियां होने की संभावना है। एक वन्यजीव मित्र को 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का प्रस्ताव है।
योग्यता और चयन प्रक्रिया
वन्यजीव मित्र की भर्ती में स्थानीय युवाओं, उनके शारीरिक मापदंड, व्यवहारिकता और क्षेत्रीय जानकारी को प्राथमिकता दी जाएगी। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को वरीयता मिल सकती है।
वन क्षेत्र से लगे गांवों के युवाओं को प्राथमिकता
वन विभाग का मानना है कि वन क्षेत्र से सटे गांवों के युवा वनों और वन्यजीवों को बेहतर ढंग से समझते हैं। ऐसे युवाओं को वन्यजीव मित्र बनाकर वे निगरानी तंत्र, पेट्रोलिंग और संरक्षण गतिविधियों में वन अमले की सहायता करेंगे।
शिकारियों पर भी रखी जाएगी नजर
स्थानीय युवाओं की भागीदारी से जंगलों में सक्रिय शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। एक तरह से वन्यजीव मित्र वन विभाग के सहयोगी और सूचना तंत्र के रूप में कार्य करेंगे। साथ ही ग्रामीणों में वन और वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का काम भी करेंगे।
प्रधानमंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ ‘चीता मित्र’ अभियान
गौरतलब है कि चीतों के संरक्षण और ग्रामीणों में उनके प्रति भय दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर ‘चीता मित्र’ की अवधारणा शुरू की गई थी। ये मित्र स्थानीय लोगों को चीतों के व्यवहार और सुरक्षा उपायों की जानकारी देकर संरक्षण में सहयोग कर रहे हैं।
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