मध्य प्रदेश सरकार पेंशन नियमों में अहम बदलाव करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव फिलहाल दावोस दौरे पर हैं, और लौटने के बाद यह बैठक आयोजित की जाएगी। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, माता-पिता की पेंशन पर केवल बड़ी संतान का अधिकार होगा, चाहे वह बेटा हो या बेटी। यानी माता-पिता की पेंशन सबसे बड़े बेटे या बेटी को मिलेगी। इसके साथ ही अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई-बहन को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी। नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है, यानी नए वित्त वर्ष से यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवनभर मिलती है
वर्तमान में पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत अंतिम वेतन का 50% हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और UPS में निश्चित पेंशन के रूप में मिलता है। अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो कुल पेंशन का 30% होती है। नए नियमों के अनुसार, अगर पति-पत्नी दोनों की मृत्यु हो जाती है तो बड़ी संतान को पेंशन का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चे भी शामिल होंगे।
बड़ी संतान को मिलेगा प्राथमिक अधिकार
इसके अलावा, पेंशन शादी के बाद भी बड़ी बेटी या बेटे को ट्रांसफर की जाएगी। यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में पेंशन पात्र हैं, तो उनकी मौत के बाद पेंशन का अधिकार दोनों परिवारों को मिलेगा। 25 साल से अधिक उम्र की बेटी या बेटे को सालाना अपने वैवाहिक या विधवा स्थिति की जानकारी देना अनिवार्य होगा, तभी वह पेंशन नियमों में पात्र रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट बैठक में पास किया जाएगा। नए वित्त वर्ष से इसे लागू किया जाएगा और बजट में इसके लिए प्रावधान किया जाएगा। वित्त विभाग भी इसके क्रियान्वयन की तैयारी शुरू कर चुका है।
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