राजधानी के अरेरा हिल्स पर स्थित 40 साल से अधिक पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवन अब इतिहास बनने जा रहे हैं। वल्लभ भवन के सामने स्थित इन दोनों भवनों को तोड़कर यहां की तर्ज पर एक आधुनिक, हाईटेक सरकारी कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा, जिसे ‘मिनी सेंट्रल विस्टा’ का स्वरूप दिया जाएगा।
ट्विन टावर और कोर्टयार्ड एनेक्सी की अवधारणा
पुराने भवनों को हटाकर यहां कोर्टयार्ड एनेक्सी बिल्डिंग बनाई जाएगी, जो ट्विन टावर की तर्ज पर आपस में कनेक्ट होंगी। इस नए कॉम्प्लेक्स में मल्टी लेवल पार्किंग और मल्टी लेवल ऑफिस फ्लोर एक साथ विकसित किए जाएंगे, जिससे जगह का बेहतर और आधुनिक उपयोग संभव होगा।
गाड़ी से सीधे ऑफिस फ्लोर तक पहुंच
परियोजना की खास बात यह होगी कि शुरुआती चार से पांच फ्लोर तक अधिकारी और कर्मचारी दोपहिया व चारपहिया वाहन से सीधे अपने संबंधित कार्यालय तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए चौड़े और घुमावदार रैंप बनाए जाएंगे, जो सीधे संबंधित फ्लोर पर जाकर लैंड होंगे। फिलहाल शहर में इस तरह की व्यवस्था निजी मॉल्स में ही देखने को मिलती है।
जीरो फाइनेंस मॉडल पर काम
सरकार इस मिनी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जीरो फाइनेंस मॉडल पर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। प्रस्ताव है कि निर्माण कार्य बिना सीधे सरकारी खर्च के, हाउसिंग बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाकर, ग्रीन एनर्जी सेक्टर में काम करने वाली बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से कराया जाए। मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला प्रशासन, हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों के साथ इस पूरे रोडमैप पर चर्चा कर सहमति बनाई गई है।
शहर का नया व्यू पॉइंट बनेगा अरेरा हिल्स
अरेरा हिल्स की पहाड़ी पर बनने वाला यह मिनी सेंट्रल विस्टा केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा। इसे दिल्ली के नए संसद भवन की तर्ज पर इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह शहर का एक प्रमुख व्यू पॉइंट बन सके। नागरिक यहां अपने परिजनों के साथ आकर सैर कर सकेंगे और शहर का मनोरम दृश्य देख पाएंगे।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट ऐसे आगे बढ़ेगा-
- प्रोजेक्ट का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा।
- सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को एक साथ नहीं तोड़ा जाएगा।
- पहले सतपुड़ा भवन का एक हिस्सा तोड़कर नया निर्माण किया जाएगा, फिर शेष पुराने हिस्से को हटाया जाएगा।
- इसी प्रक्रिया से विंध्याचल भवन का पुनर्निर्माण होगा।
- दोनों भवनों के बीच ग्रीन पॉकेट कोर्टयार्ड विकसित किया जाएगा।
- डिजाइन ऐसी होगी कि भवन दीवारों से सुरक्षित भी होंगे और खुले आसमान का अनुभव भी देंगे।
- आपसी कनेक्टिविटी इस तरह होगी कि वाहन के साथ सीधे संबंधित फ्लोर तक पहुंच संभव होगी।
- कोर्टयार्ड और दोनों भवन पूरी तरह कनेक्ट रहेंगे, जिससे लिफ्ट की आवश्यकता न्यूनतम होगी।
- यह परियोजना पूरी होने के बाद न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भोपाल की पहचान में भी एक नया अध्याय जोड़ेगी।
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