रीवा। आधुनिकता की दौड़ में जहां विवाह समारोहों से पारंपरिक रस्में धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सनातन संस्कृति से जुड़ा एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। यहां एक विवाह समारोह में दुल्हन की विदाई आधुनिक साधनों की जगह पारंपरिक डोली में कराई गई, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
सनातन संस्कारों को सहेजने की पहल, रीवा के विवाह समारोह में दिखी अनोखी परंपरा
रीवा। आधुनिक युग में जब शादियों में लग्ज़री गाड़ियों, आधुनिक संगीत और पाश्चात्य रीति-रिवाजों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, ऐसे समय में रीवा जिले में सनातन परंपरा की एक सशक्त और भावनात्मक मिसाल सामने आई है। जिले के एक विवाह समारोह में दुल्हन की विदाई पारंपरिक डोली में कराई गई, जिसने न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहराई को भी उजागर किया। विदाई के समय ढोल-नगाड़ों की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और परिजनों की नम आंखों के बीच दुल्हन को सुसज्जित डोली में बैठाया गया। चारों ओर पारंपरिक वेशभूषा में परिजन, महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं और बुजुर्ग आशीर्वाद देते नजर आए। यह दृश्य मानो पुराने समय की यादों को ताज़ा कर रहा था। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक रस्म निभाना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देना था कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों और संस्कारों को भी सहेज कर रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सनातन परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों और स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। यही कारण है कि यह पारंपरिक विदाई सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे सनातन संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संतुलन देखने को मिलता है, तो समाज में सांस्कृतिक चेतना और अधिक मजबूत होती है। रीवा में हुआ यह आयोजन न सिर्फ एक विवाह समारोह था, बल्कि सनातन परंपरा को सहेजने की एक प्रेरणादायक कोशिश भी थी।
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