मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अचानक एक बाघ की मौजूदगी का पता चलना वन विभाग के लिए किसी बड़े अलर्ट से कम नहीं है। पहचान संख्या RBT-2512 वाला यह युवा बाघ लगभग चार महीने पहले रणथंभौर से अपने प्राकृतिक प्रवास के दौरान यहां पहुँचा है। इस बाघ की हर गतिविधि पर वन अधिकारी करीबी नजर रख रहे हैं और राजस्थान तथा मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के वन विभाग संयुक्त रूप से इस पर निगरानी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि यह बाघ फिलहाल चीतों के रहने वाले क्षेत्र से पर्याप्त दूरी बनाए हुए है, जिससे तत्काल कोई खतरा नहीं है।
‘सुलताना’ का राजकुमार और अपनी सल्तनत की तलाश की कहानी
यह बाघ रणथंभौर की मशहूर बाघिन T-107 यानी ‘सुलताना’ का बेटा है। ढाई से तीन वर्ष उम्र का यह यंग टाइगर अब अपने प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार अपनी अलग territory की खोज में निकला हुआ है। इसी प्रक्रिया में उसने रणथंभौर पार्क की सीमा को पार किया और नए जंगलों की तलाश में उत्तर-पश्चिम की दिशा से निकलकर अंततः कूनो के घने वन क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इन उम्र के बाघ अक्सर अपनी मां से अलग होने के बाद नए क्षेत्रों की तलाश करते हैं, जो उनके जीवनचक्र का स्वाभाविक हिस्सा है।
चंबल के बीहड़: बड़े शिकारियों का प्राकृतिक कॉरिडोर
राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच बहने वाली चंबल नदी तथा उसके बीहड़ लंबे समय से वन्यजीवों के आवागमन का प्राकृतिक गलियारा रहे हैं। बड़ी बिल्लियाँ विशेष रूप से इस मार्ग का इस्तेमाल करती हैं। पिछले दस वर्षों में इस रास्ते पर कई बाघ और चीते दोनों राज्यों के बीच आवाजाही करते देखे गए हैं। रणथंभौर के कई बाघ पहले भी कूनो पहुँच चुके हैं, और इसी तरह कूनो से कई चीते रणथंभौर के इलाकों में देखे गए हैं। इस संघर्षपूर्ण लेकिन प्राकृतिक कॉरिडोर ने बड़े शिकारियों की गतिविधियों को हमेशा गतिशील रखा है।
चीतों की सुरक्षा का सवाल और दो शिकारियों के आमने-सामने होने का खतरा
कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के बाद से यहां वन्यजीवों का संतुलन बेहद संवेदनशील हो गया है। ऐसे में एक मजबूत और युवा बाघ का प्रवेश वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन जाता है, क्योंकि बाघ और चीते दोनों apex predators हैं और उनके बीच संघर्ष की संभावनाएं रहती हैं। हालांकि फिलहाल बाघ चीतों के मुख्य क्षेत्र से दूर है, लेकिन उसके मूवमेंट को लगातार ट्रैक किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।
वन विभाग की रणनीति और भविष्य की निगरानी व्यवस्था
इस अप्रत्याशित एंट्री के बाद दोनों राज्यों के वन अधिकारी संयुक्त रूप से स्थिति पर नजर रख रहे हैं। बाघ की गतिविधियों का GPS और कैमरा ट्रैप के जरिये लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य बाघ को किसी अन्य सुरक्षित क्षेत्र की ओर मोड़ने और चीतों के संरक्षण को पूरी तरह सुरक्षित रखने का है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि भारत में बड़े शिकारियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर का निर्माण और व्यापक संरक्षण रणनीतियों की आवश्यकता कितनी ज्यादा है।
कूनो में बाघ की एंट्री से बढ़ा रोमांच और सतर्कता
सुलताना का यह युवा बेटा अब कूनो के जंगलों में अपनी जगह तलाश रहा है, जिसे लेकर रोमांच और जोखिम दोनों बने हुए हैं। वन विभाग के लिए यह चुनौती है कि बाघ की प्राकृतिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यह घटना भारत के संरक्षण प्रयासों और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करती है।
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