मध्यप्रदेश के उत्सव और मेले न सिर्फ प्रदेशवासियों बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करते रहे हैं। इन आयोजनों में विक्रमोत्सव ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इस वर्ष उज्जैन में 12 फरवरी से 30 जून तक आयोजित होने वाला 139 दिवसीय विक्रमोत्सव अब तक का सबसे लंबी अवधि का सांस्कृतिक महोत्सव बनकर रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बहुआयामी आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमोत्सव-2026 को बहुआयामी और व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए हैं। संस्कृति विभाग और सहयोगी संस्थाएं तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। मुख्यमंत्री स्वयं प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक कर आयोजन की रूपरेखा और प्रगति पर नजर रख रहे हैं।
सांस्कृतिक, शैक्षणिक और वैचारिक कार्यक्रमों की भरमार
विक्रमोत्सव के दौरान कलश यात्रा, नाटक मंचन, वैचारिक समागम, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और सूर्योपासना जैसे विविध आयोजन होंगे। प्रदेश के विभिन्न नगरों में विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया जाएगा, वहीं शिक्षण संस्थानों में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।
विज्ञान और इतिहास के संगम पर विशेष कार्यक्रम
सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करने के लिए विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को जोड़कर अभिनव कार्यक्रम किए जाएंगे। इससे युवाओं को इतिहास और विज्ञान के समन्वय से परिचित कराया जाएगा।
फरवरी से जून तक लगातार होंगे प्रमुख आयोजन
15 फरवरी को शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ, महादेव की कलाओं का शिवार्चन, कलश यात्रा, ‘शिवोऽहम’ के अंतर्गत बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और विक्रम व्यापार मेले का आयोजन होगा। 16 से 20 फरवरी तक शिव पुराण कथा, 16 से 25 फरवरी तक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां, और 26 से 28 फरवरी तक इतिहास समागम, पुतुल समारोह तथा अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
गुड़ी पड़वा और उज्जयिनी गौरव दिवस होंगे आकर्षण का केंद्र
गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के रामघाट (दत्त अखाड़ा) में सूर्योपासना का आयोजन होगा। उज्जयिनी गौरव दिवस के अवसर पर शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण, विक्रम पंचांग 2082-83 और ‘आर्ष भारत’ के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य और प्रसिद्ध पार्श्व गायकों की संगीतमय प्रस्तुतियां होंगी।
विरासत से युवाओं को जोड़ने में मिल रही सफलता
सम्राट विक्रमादित्य के योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पिछले वर्ष नई दिल्ली में विक्रमादित्य पर आधारित मंचन एक बड़ी उपलब्धि रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत से विकास’ के संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य पीठ, वीर भारत न्यास और अन्य संस्थाओं द्वारा नवाचार के साथ गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हाल ही में ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ ऑनलाइन प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया और ई-स्कूटी व लैपटॉप जैसे पुरस्कार भी जीते।
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