मुंबई - तमन्ना भाटिया उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाई है। करीब दो दशक के करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं। इन दिनों वह अपनी नई फिल्म ‘द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को लेकर चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है और तमन्ना के अभिनय को भी दर्शकों की सराहना मिल रही है। फिल्म की सफलता को लेकर अभिनेत्री ने खुशी जाहिर की है। उनके मुताबिक, कहानी में भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय परंपराओं को जिस तरह जगह दी गई है, उससे दर्शकों को जुड़ने का एक नया अनुभव मिला है।
छठ महापर्व की झलक ने खींचा दर्शकों का ध्यान
तमन्ना ने फिल्म को लेकर बातचीत में बिहार की सांस्कृतिक परंपराओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर उन्होंने ऐसे दृश्य देखे, जहां दर्शक थिएटर में प्रवेश करने से पहले चप्पल उतारते नजर आए। कुछ जगहों पर पॉपकॉर्न के बजाय ठेकुआ बांटने की चर्चा भी सामने आई।
अभिनेत्री के अनुसार, छठ महापर्व और उससे जुड़ी परंपराओं को बड़े पर्दे पर इस तरह प्रस्तुत करना दर्शकों के लिए खास अनुभव रहा। उनका मानना है कि भारतीय सिनेमा में दिवाली और अन्य त्योहारों को कई बार दिखाया गया है, लेकिन छठ जैसे पर्व को कहानी का अहम हिस्सा बनाना दर्शकों के लिए अलग अनुभव पेश कर सकता है।
लोककथाओं को नए अंदाज में पेश करने पर जोर
तमन्ना का मानना है कि भारतीय लोककथाओं और परंपराओं को केवल पारंपरिक तरीके से दिखाने के बजाय आधुनिक सिनेमाई शैली में भी प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे नई पीढ़ी और परिवार के साथ फिल्म देखने वाले दर्शकों को ऐसी कहानियों से जुड़ने का मौका मिलता है। उनके मुताबिक, फिल्मों में संस्कृति का समावेश तभी प्रभावी बनता है, जब वह कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा हो। फिल्म में छठी मैया से जुड़े गीतों और छठ महापर्व के दृश्यों को कहानी में शामिल करना इसी प्रयास का हिस्सा बताया गया है।
मल्टी-जॉनर फिल्मों की बढ़ती जरूरत
अभिनेत्री ने फिल्मों के बदलते स्वरूप पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार, दर्शकों को अब अलग-अलग शैलियों का मेल देखने को मिल सकता है। ऐसी फिल्में, जिनमें लोककथा, मनोरंजन, भावनाएं और पारिवारिक जुड़ाव एक साथ मौजूद हों, विभिन्न आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित कर सकती हैं। तमन्ना के विचार में किसी फिल्म की पहचान केवल उसके जॉनर से नहीं, बल्कि उसकी कहानी और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता से भी बनती है। संस्कृति से जुड़ी कहानियां स्थानीय पहचान को सामने लाने के साथ व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती हैं।
तमन्ना के करियर में एक और चर्चा
तमन्ना भाटिया ने अपने करियर में रोमांटिक फिल्मों, एक्शन, कॉमेडी और अन्य शैलियों में काम किया है। दक्षिण भारतीय फिल्मों में लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके करियर की विविधता ने उन्हें अलग-अलग दर्शकों के बीच पहचान दिलाई है।
फिलहाल, उनकी नई फिल्म को लेकर चर्चा का केंद्र भारतीय लोकसंस्कृति और छठ महापर्व की प्रस्तुति है। हालांकि फिल्म की कमाई और दर्शकों की प्रतिक्रिया से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, लेकिन तमन्ना की बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि वह भारतीय परंपराओं को मनोरंजन के माध्यम से व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के विचार को महत्व देती हैं।