रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। बकाया भुगतान को लेकर AHPI (एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया) से जुड़े निजी अस्पतालों ने 30 जनवरी 2026 से आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने का फैसला लिया है।
निजी अस्पतालों का आरोप है कि राज्य सरकार पर 1500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है, जिसके चलते अस्पतालों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
जुलाई 2025 से नहीं हुआ भुगतान, अस्पतालों में भारी नाराजगी
AHPI से जुड़े अस्पताल संचालकों का कहना है कि जुलाई 2025 से आयुष्मान योजना के तहत कोई भुगतान नहीं किया गया है, जबकि जनवरी से मार्च 2025 के बीच का 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान अब तक बकाया है। बार-बार मांग के बावजूद भुगतान को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पोस्टर जारी कर दी गई लिखित सूचना
निजी अस्पतालों ने इलाज बंद रखने को लेकर पोस्टर जारी कर लिखित सूचना भी चस्पा कर दी है। मरीजों से अपील की गई है कि वे 30 जनवरी को इलाज के लिए अस्पताल न आएं और अगले दिन आने का प्रयास करें।
AHPI का अल्टीमेटम—भुगतान नहीं तो आंदोलन लंबा
AHPI ने सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन लंबे समय तक जारी रह सकता है। संगठन का कहना है कि बिना भुगतान के इलाज जारी रखना अस्पतालों के लिए संभव नहीं है।
30 जनवरी को प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन
AHPI इंडिया की बैठक में आयुष्मान योजना की अनियमितताओं पर गहरी चिंता जताई गई। 30 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ के सभी निजी अस्पतालों में :
- अस्पताल संचालक और पैरामेडिकल स्टाफ काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे
- आयुष्मान योजना के तहत काम बंद आंदोलन किया जाएगा
- गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर
- इलाज बंद होने से सबसे ज्यादा असर गरीब, ग्रामीण और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा, जो आयुष्मान योजना के भरोसे निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं।
IMA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने सरकार को घेरा
IMA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि “पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली की कमी से आयुष्मान योजना की हालत खस्ता हो गई है। सरकार को महतारी वंदन योजना की तरह नियमित भुगतान व्यवस्था लागू करनी चाहिए।”
भुगतान में देरी से आयुष्मान योजना प्रभावित
अस्पताल संघ का कहना है कि लगातार भुगतान में देरी से आयुष्मान योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और निजी अस्पताल योजना से दूरी बनाने को मजबूर हो रहे हैं।
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