बारिश में होने वाला दूसरा आम इन्फेक्शन है, ‘थ्रोट इन्फेक्शन’ यानी गले में होने वाला इन्फेक्शन. जैसे गले में खराश होना, कफ होना, जलन या खुजली होना, सर्दी-खांसी होना. यह सबकुछ आम लक्षण हैं. सबसे ज्यादा ये बच्चों में होता है क्योंकि उनकी इम्यूनिटी एडल्ट्स जितनी स्ट्रॉन्ग नहीं होती है. इस कारण उनमें संक्रमण जल्दी फैलने का खतरा रहता है. आज बात करेंगे बारिश के मौसम में आंखों और गले में होने वाले इन्फेक्शन्स की।
जानेंगे कि- बारिश में कैसे रखें आंखों का ख्याल
बारिश में कंजंक्टिवाइटिस आम समस्या
आंखें बहुत ही नाजुक और संवेदनशील होती हैं. इनके साथ थोड़ी सी भी परेशानी हो तो तुरंत लक्षण दिखाई देने लगते हैं. कंजंक्टिवाइटिस
इस मौसम में होने वाली आम बीमारी है. यह एक्यूट या क्रॉनिक दोनों ही रूपों में हो सकती है. दो सप्ताह में अपने आप ही ठीक भी हो जाती है.
लेकिन कई लोगों में कंजंक्टिवाइटिस के गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, जिसके तुरंत उपचार की जरूरत होती है.
हमारी आंखों में एक पारदर्शी पतली झिल्ली, कंजंक्टिवा होती है. ये हमारी पलकों के अंदरूनी और आंखों की पुतली के सफेद भाग को कवर करती है. इसमें सूजन आने या संक्रमित होने को ही कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं.
आई फ्लू के कारण
• गंदे हाथों को बार बार आंखों में लगाना
• संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना
• किसी दूसरे के कपड़े- तौलिया का इस्तेमाल करना
• पुराने कॉन्टैक्ट लेंस यूज करना
• खराब या बहुत पुराने आई मेकअप का इस्तेमाल करना
कैसे करें आई फ्लू का इलाज
• सबसे पहले डॉक्टर को दिखाएं
• सुझाए गए आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें
• साफ पानी से आंखों को 3-4 बार धोएं
• डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक्स लें
• कुछ वक्त तक आई मेकअप न करें
बारिश के मौसम में बढ़ता थ्रोट इन्फेक्शन
मौसम बदलते ही हमारे शरीर पर भी इसका असर पड़ता है. गले का संक्रमण आमतौर पर वायरस के कारण होता है. अक्सर यह उन वायरसों में से एक है, जो सामान्य सर्दी का कारण बनता है, जैसे कि राइनोवायरस, एडेनोवायरस, इन्फ्लूएंजा वायरस या रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस.• थ्रोट इन्फेक्शन के लक्षणों में निगलने और सूजन के साथ गंभीर दर्द, लाल टॉन्सिल, गले में जलन और कफ शामिल है.
• टॉन्सिल में कभी-कभी सफेद धब्बे भी हो जाते हैं.
• इसका दर्द कई बार कानों में भी महसूस होता है। कुछ लोगों को बुखार, सिरदर्द होने लगता है और पेट खराब रहता है.
• जिन लोगों में बार-बार टॉन्सिल संक्रमण होता है, उन्हें सांसों में बदबू की समस्या भी होती है.
थ्रोट इन्फेक्शन होने का कारण
• खुले में मिल रहे स्ट्रीट फूड खाना
• बाहर का संक्रमित पानी पीना
• संक्रमित व्यक्ति की संपर्क में आना
• एसिड रिफ्लक्स
थ्रोट इन्फेक्शन का इलाज
• स्ट्रीट फूड विल्कुल न खाएं
• तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें
• एंटीबायोटिक्स का सेवन करें
• घर का फिल्टर या उबला पानी पिएं
• सर्दी जुकाम होने पर साफ सफाई रखें
• खट्टी और ठंडी चीजों से परहेज करें
बारिश में होने वाले वायरल इन्फेक्शन से कैसे बचें
बारिश के मौसम में धूप की कमी और उमस के कारण कई मानसूनी बीमारियां हवा, पानी या मच्छर के काटने से फैलती हैं. इसलिए हमें एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है.बीमारियों से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-
खाने से पहले हमेशा फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धोएं.
अपने भोजन को हमेशा ढंककर रखें और बाहर का खाना खाने से बचें.
यदि बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है तो डॉक्टर से कंसल्ट करके उन्हें टीका जरूर लगवाएं।
मानसून के मौसम का आनंद तो लें, लेकिन सुरक्षित रहें. गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग संक्रामक रोगों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. इसलिए इनको सावधानी बरतने की ज्यादा जरूरत है.
Comments (0)