हार्ट अटैक के मामले इन दिनों काफी ज्यादा सुनने को मिल रहे हैं, जिसमें बच्चे भी शामिल है लेकिन छोटे व टीएन बच्चे हार्ट अटैक के शिकार क्यों हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र में 14 साल के बच्चे को हार्ट अटैक आ गया वो भी उस समय जब वह स्कूल ट्रिप के दौरान पार्क में था। जानकारी के मुताबिक, बच्चे को अचानक सीने में दर्द, बैचेनी हुई और वह गिर पड़ा। ऐसे और भी बहुत सारे मामले सामने आए हैं लेकिन यहां सवाल यह है कि बच्चों को अब हार्ट अटैक क्यों आ रहा है।
बच्चों में दिखने वाले हार्ट अटैक के लक्षण
बच्चे को सीने में भारीपन-दर्द महसूस हो रहा हो तो नजर अंदाज ना करें। फिजिकल एक्टिविटी के दौरान दर्द महसूस हो तो तुरंत डॉक्टरी संपर्क करे क्योंकि कुछ लोग इसे गैस का दर्द समझ कर लापरवाही बरत देते हैं।
हार्ट अटैक होने का कारण, छोटे बच्चों में होंठों के आस-पास नीले निशान होना। बच्चे के होंठ, उंगलियां और त्वचा नीली पड़ रही है ऐसा तब होता है जब दिल सही मात्रा में ब्लड पंप नहीं कर पाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है।
बिना किसी कारण के बच्चा कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और बेहोशी छाना, दिल की धड़कन बढ़ती है तो यह भी दिल से जुड़ी गंभीर समस्या की तरफ इशारा करता है।
बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होना या कुछ देर चलते पर ही सांस फूलने लगना। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करने पर ही या सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते ही हांफने लगे।फिजिकल एक्टिविटी के दौरान पसीने से भीग जाता है और उल्टी हो रही है तो आपको सतर्क होने की जरूरत है।
उसे छाती में दर्द, सांस लेने में मुश्किल हो रही हो तो यह हार्ट प्रॉब्लम्स की और इशारा करता है हालांकि ये लक्षण खून की कमी के भी हो सकते है लेकिन चेकअप करवाना जरूरी है।
छोटी उम्र में हार्ट अटैक आने के कारण
छोटी उम्र में हार्ट अटैक आने के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। खराब लाइफस्टाइल, तनाव,अनहेल्दी फूड्स। एक्सपर्ट की मानें तो ऐसा होने का कोई एक स्टीक कारण बता पाना मुश्किल है हालांकि इसकी वजह खराब लाइफस्टाइल को माना जा सकता है। बच्चों का खान-पान लगातार खराब अनहैल्दी होता जा रहा है और फिजिकल एक्टिविटी ना के बराबर। बॉडी एक्टिविटी में कमी होने से भी हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ता है।
मोबाइल, टीवी और ऑनलाइन क्लासेज में धंसे बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी ना के बराबर हो गई है जिसके चलते मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी प्रॉब्लम बचपन में ही चपेट में ले रही हैं और यहीं समस्या हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा रही है। मोटापा की वजह से दिल के रोगों का खतरा अधिक रहता है।
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड
खान-पान में वेस्टर्न कल्चर फॉलो होना भी हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा रहा है। जंक, फास्ट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बच्चे अधिक कर रहे हैं। इनमें ट्रांस फैट, बहुत ज्यादा शुगर और नम होता है जो दिल की धमनियों को कमजोर करते हैं और यह हार्ट अटैक जोखिम बढ़ाता है। हार्ट अटैक से बचाव के लिए बच्चों की जीवन शैली और खान-पान पर खास ध्यान देना जरूरी है। नियमित रूप में उनकी डाइट में संतुलित और पोषण आहार शामिल होना जरूरी है। शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम में शामिल करें।
Comments (0)