दुनिया भर में लाखों लोग अनिद्रा या देर से नींद आने की समस्या से जूझ रहे हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार 5 से 50 प्रतिशत तक लोग किसी न किसी रूप में नींद से जुड़ी परेशानी झेलते हैं। कोई घंटों करवटें बदलता रहता है तो कोई आधी रात के बाद भी नींद के इंतज़ार में रहता है। ऐसे में त्वरित और प्रभावी उपायों की तलाश स्वाभाविक है।
वायरल होता ‘मिलिट्री स्लीप मेथड’
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों ‘मिलिट्री स्लीप मेथड’ खूब चर्चा में है। दावा किया जाता है कि यह तकनीक अपनाने से मात्र दो मिनट में नींद आ सकती है। तेज़ रफ्तार जीवनशैली, तनाव और स्क्रीन टाइम से जूझ रहे लोगों के लिए यह तरीका किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।
इस तकनीक की उत्पत्ति और इतिहास
मिलिट्री स्लीप मेथड को अमेरिकी ट्रैक एंड फील्ड कोच लॉयड ‘बड’ विंटर ने 1981 में अपनी किताब Relax and Win में विस्तार से बताया था। दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह तकनीक अमेरिकी नेवी के पायलट ट्रेनिंग स्कूल के छात्रों के लिए विकसित की गई थी, ताकि वे अत्यधिक तनाव, डर और दबाव की परिस्थितियों में भी अच्छी नींद ले सकें और अपने प्रदर्शन को बेहतर बना सकें।
दो मिनट में सोने का दावा कितना मजबूत?
लॉयड विंटर का दावा था कि अगर कोई व्यक्ति लगातार छह हफ्तों तक इस तकनीक का अभ्यास करे, तो वह किसी भी समय और किसी भी हालात में केवल दो मिनट के भीतर सो सकता है। पायलटों के लिए यह इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि युद्धकाल में नींद की कमी सीधे जानलेवा साबित हो सकती थी।
मिलिट्री स्लीप मेथड के मुख्य स्टेप्स
इस तकनीक की खासियत यह है कि यह शरीर और दिमाग—दोनों को क्रमिक रूप से रिलैक्स करने पर आधारित है। सबसे पहले चेहरे, सिर और जबड़े को ढीला छोड़ते हुए गहरी और धीमी सांस ली जाती है। इसके बाद कंधों को रिलैक्स किया जाता है और सांस को नियंत्रित किया जाता है। फिर बारी-बारी से दोनों हाथों को—बाइसेप्स से लेकर उंगलियों तक—पूरी तरह ढीला छोड़ा जाता है। इसके बाद पैरों को जांघ से लेकर टखनों तक रिलैक्स किया जाता है।
मानसिक शांति इस तकनीक की कुंजी
शारीरिक शिथिलता के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण आता है—दिमाग को शांत करना। इसमें किसी भी तरह का विचार न करने की कोशिश की जाती है। इसके लिए किसी शांत दृश्य की कल्पना की जाती है, जैसे वसंत का दिन, हरियाली या शांत झील। यदि विचार बार-बार आने लगें, तो “मत सोचो” जैसे शब्द मन में दोहराकर कम से कम 10 सेकंड तक अन्य विचारों को रोका जाता है।
विज्ञान और व्यवहारिक असर
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक मूल रूप से प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन और विज़ुअलाइज़ेशन का संयोजन है, जिसे तनाव कम करने के लिए प्रभावी माना जाता है। हालांकि यह हर व्यक्ति पर समान रूप से असर करे, ऐसा ज़रूरी नहीं। लेकिन नियमित अभ्यास से यह नींद की गुणवत्ता में सुधार ज़रूर कर सकती है।
क्या यह तरीका सभी के लिए है?
मिलिट्री स्लीप मेथड कोई जादुई इलाज नहीं, बल्कि एक मानसिक-शारीरिक अभ्यास है। हल्की से मध्यम अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है। गंभीर नींद संबंधी विकारों में विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी रहती है। फिर भी, बिना दवा और बिना खर्च के यह तरीका आज़माने लायक ज़रूर माना जा रहा है।
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