कोलकाता डेस्क: मौसम में बदलाव का असर सिर्फ सर्दी-जुकाम या एलर्जी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई लोगों को इस दौरान जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत भी होने लगती है। खासकर जिन लोगों को पहले से गठिया, पुरानी चोट या हड्डियों से जुड़ी समस्या है, उनमें परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान शरीर को नए वातावरण के अनुसार ढलने में समय लगता है। इसी दौरान मांसपेशियों में जकड़न और दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, हर बार दर्द को केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
मौसम बदलने पर शरीर में क्यों बढ़ती है जकड़न?
मौसम का तापमान बदलने पर शरीर का बाहरी हिस्सा तेजी से प्रतिक्रिया करता है, जबकि शरीर अंदर से अपना सामान्य तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है। इस बदलाव के कारण मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों में खिंचाव या जकड़न महसूस हो सकती है। ठंड के दौरान रक्त वाहिकाएं कुछ हद तक सिकुड़ सकती हैं, जिससे प्रभावित हिस्से में दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से जोड़ों की समस्या है, उनके लिए यह बदलाव अधिक परेशानी वाला हो सकता है। पुरानी चोट या ऑपरेशन वाली जगह पर भी संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसलिए मौसम बदलते ही दर्द शुरू होना कई लोगों के लिए सामान्य अनुभव हो सकता है।
सिर्फ सर्दी ही नहीं, बारिश और गर्मी में भी हो सकता है दर्द
जोड़ों के दर्द को केवल ठंड के मौसम से जोड़ना पूरी तरह सही नहीं है। बारिश शुरू होने या बारिश खत्म होकर गर्मी बढ़ने के दौरान भी शरीर को तापमान और वातावरण में बदलाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में कुछ लोगों को मांसपेशियों में भारीपन, जकड़न या पुराने दर्द की शिकायत हो सकती है। जिन लोगों के शरीर में पुरानी चोट, इंप्लांट या पैर में रॉड जैसी मेडिकल हिस्ट्री है, उन्हें प्रभावित हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में मौसम का असर अलग-अलग होता है। लगातार या असामान्य दर्द होने पर इसे सिर्फ मौसम का असर मानना ठीक नहीं है।
एक्सरसाइज से मिल सकती है राहत
मौसम बदलने के दौरान शरीर को सक्रिय रखना जोड़ों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। नियमित और हल्की एक्सरसाइज से मांसपेशियों की सक्रियता बनी रहती है और शरीर में अकड़न कम महसूस हो सकती है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से जकड़न बढ़ सकती है, इसलिए बीच-बीच में हल्की गतिविधि करना मददगार हो सकता है। हालांकि दर्द बहुत ज्यादा होने पर खुद से भारी एक्सरसाइज शुरू करने से बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट सही एक्सरसाइज की सलाह दे सकते हैं। रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ पर्याप्त आराम भी जरूरी है।
गर्म सिकाई और पानी पीना भी हो सकता है मददगार
जोड़ों या मांसपेशियों में हल्का दर्द और जकड़न होने पर प्रभावित हिस्से पर हल्की गर्म सिकाई आराम दे सकती है। शरीर को हाइड्रेटेड रखना भी जरूरी है, क्योंकि पर्याप्त पानी पीने से शरीर के सामान्य कामकाज को सपोर्ट मिलता है। ठंड के मौसम में लोग अक्सर पानी कम पीते हैं, इसलिए इस आदत पर ध्यान देना चाहिए। मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनने से शरीर को अचानक तापमान बदलाव से बचाने में मदद मिल सकती है। अगर दर्द लगातार बना रहता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
गठिया के मरीज रखें खास सावधानी
जिन लोगों को पहले से गठिया या अर्थराइटिस की समस्या है, उनके लिए मौसम बदलने के दौरान दर्द बढ़ना परेशानी का संकेत हो सकता है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और उपचार को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। केवल दर्द कम होने पर दवा रोक देना या मौसम बदलते ही खुद से दवा शुरू करना उचित नहीं है। अगर दर्द पहले की तुलना में ज्यादा हो रहा है या बार-बार लौट रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है। विशेषज्ञ जरूरत के मुताबिक दवा, फिजियोथेरेपी या विशेष एक्सरसाइज की सलाह दे सकते हैं। सही समय पर उपचार लेने से समस्या को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।