दशकों तक फ्रांस और जर्मनी यूरोपीय यूनियन की रीढ़ माने जाते रहे हैं। आर्थिक नीतियों से लेकर रक्षा और कूटनीति तक, यूरोप की दिशा अक्सर इसी जोड़ी ने तय की। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। यूरो न्यूज और पॉलिटिको की रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज फ्रांस से दूरी बनाते हुए इटली के साथ नई राजनीतिक और रणनीतिक निकटता बना रहे हैं।
दावोस से रोम तक: मर्ज-मेलोनी की बढ़ती नजदीकी
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से ही मर्ज ने संकेत दे दिया था कि यूरोपीय यूनियन को “अलग और बेहतर तरीके” से चलाने पर वह जॉर्जिया मेलोनी के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। 23 जनवरी को रोम में प्रस्तावित इटली-जर्मनी शिखर सम्मेलन को इसी नई दिशा की शुरुआत माना जा रहा है, जहां दोनों नेता यूरोप के भविष्य को लेकर नए सुझाव रख सकते हैं।
मैक्रों से नाराजगी की जड़ें क्या हैं
फ्रेडरिक मर्ज और जॉर्जिया मेलोनी, दोनों की राजनीतिक सोच दक्षिणपंथी झुकाव वाली मानी जाती है और दोनों अमेरिका के साथ टकराव से बचने के पक्षधर हैं। इसके उलट फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कई मुद्दों पर अधिक आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। यही वैचारिक अंतर जर्मनी और फ्रांस के बीच बढ़ती दूरी की एक बड़ी वजह बन रहा है।
मर्कोसुर ट्रेड डील ने बढ़ाया तनाव
फ्रांस-जर्मनी संबंधों में खटास की सबसे बड़ी वजह दक्षिण अमेरिका के मर्कोसुर देशों के साथ होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। जर्मनी की अर्थव्यवस्था निर्यात पर आधारित है और वह इस समझौते को अपने उद्योग के लिए फायदेमंद मानता है। दूसरी ओर फ्रांस में किसानों का राजनीतिक दबदबा है और वे सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से अपनी आजीविका को खतरे में देखते हैं। मैक्रों सरकार इसी दबाव में मर्कोसुर डील को टाल रही है, जिससे जर्मनी नाराज है।
फाइटर जेट प्रोजेक्ट में भी टकराव
दोनों देशों के बीच 100 अरब यूरो के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) प्रोजेक्ट को लेकर भी मतभेद गहराते जा रहे हैं। फ्रांस इस परियोजना में डिजाइन और नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहता है और अपनी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को प्रमुख भूमिका देना चाहता है। वहीं, जर्मनी बराबरी की हिस्सेदारी और अपनी कंपनी एयरबस के लिए समान अधिकार की मांग कर रहा है। यह टकराव रणनीतिक साझेदारी को कमजोर कर रहा है।
मेलोनी: जर्मनी के लिए नया यूरोपीय विकल्प
जर्मनी का प्रमुख अखबार हांडेल्सब्लाट लिखता है कि जॉर्जिया मेलोनी अब फ्रेडरिक मर्ज के लिए “तेजी से अहम सहयोगी” बनती जा रही हैं। अमेरिका के साथ व्यापार, टैरिफ और वैश्विक राजनीति जैसे मुद्दों पर इटली और जर्मनी की सोच फ्रांस से अधिक मेल खाती है। दोनों नेता अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के बजाय संवाद को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
यूरोप की राजनीति में बदलती तस्वीर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर फ्रांस-जर्मनी की पारंपरिक धुरी कमजोर होती है और जर्मनी-इटली की नई जोड़ी उभरती है, तो यूरोपीय यूनियन की नीतियों में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह बदलाव न सिर्फ यूरोप, बल्कि अमेरिका और वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
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