संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2018 में घोषित अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस पहली बार 2019 में मनाया गया। इसका मूल उद्देश्य शिक्षा को एक मौलिक मानव अधिकार, सार्वजनिक हित और सतत विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करना है। यह दिवस वैश्विक समुदाय को यह समझाने का प्रयास करता है कि बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कोई भी समाज स्थायी प्रगति नहीं कर सकता।
शिक्षा: रोजगार से आगे, चेतना का विस्तार
शिक्षा को अक्सर केवल रोजगार से जोड़कर देखा जाता है, जबकि इसका वास्तविक स्वरूप इससे कहीं व्यापक है। शिक्षा व्यक्ति में आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करती है। यही गुण एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक चुनौतियाँ और शिक्षा का संकट
आज भी दुनिया भर में करोड़ों बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में स्कूल सबसे पहले बंद होते हैं, गरीबी बच्चों को मजदूरी की ओर धकेल देती है, और लैंगिक असमानता कई देशों में बालिकाओं की शिक्षा में बड़ी बाधा बनी हुई है। इसके अलावा डिजिटल विभाजन ने शिक्षा की समान पहुंच को और जटिल बना दिया है।
समावेशी और समान शिक्षा की आवश्यकता
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस यह संदेश देता है कि शिक्षा प्रणाली समावेशी और समान होनी चाहिए। सामाजिक, आर्थिक या भौगोलिक स्थिति के आधार पर किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। विशेष जरूरतों वाले बच्चों, शरणार्थियों और हाशिए पर खड़े समुदायों तक शिक्षा पहुंचाना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
नवोन्मेष और तकनीक की भूमिका
डिजिटल तकनीक और नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियाँ शिक्षा को अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकती हैं। ऑनलाइन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज ने सीखने के नए द्वार खोले हैं। हालांकि, इनके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि तकनीक सभी तक समान रूप से पहुंचे।
सतत विकास लक्ष्यों में शिक्षा का केंद्रीय स्थान
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। शिक्षा गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सुधार, लैंगिक समानता और आर्थिक विकास जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति का आधार बनती है। शिक्षित समाज ही जलवायु परिवर्तन और वैश्विक असमानताओं जैसी चुनौतियों का समाधान खोज सकता है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए साझा जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज को साझा जिम्मेदारी का बोध कराता है। शिक्षा में निवेश केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक नैतिक दायित्व है। जब शिक्षा सशक्त होती है, तब समाज स्वयं सशक्त हो जाता है।
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