भारतीय खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि खालिस्तान समर्थक संगठन कनाडा और ब्रिटेन में बढ़ती निगरानी के कारण अब रणनीतिक रूप से अपना ध्यान ऑस्ट्रेलिया की ओर मोड़ रहे हैं। पहले जहां संदिग्ध गतिविधियाँ सीमित स्तर पर थीं, वहीं हाल के महीनों में इनके पैटर्न और तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट का कहना है कि यह बदलाव सोची-समझी योजना का हिस्सा प्रतीत होता है।
ऑस्ट्रेलिया में बढ़े प्रचार और हिंसक गतिविधियाँ
अधिकारियों के मुताबिक जुलाई, अगस्त और दिसंबर 2025 से ऑस्ट्रेलिया में “रेफरेंडम” जैसे विवादित आयोजन, दीवारों पर भारत-विरोधी ग्रैफिटी, सार्वजनिक स्थानों पर तोड़फोड़ और भड़काऊ नारों की घटनाएँ लगातार सामने आई हैं। विशेष रूप से ‘Sikhs For Justice (SFJ)’ जैसे संगठनों के ऑनलाइन अभियान अब ऑस्ट्रेलिया-केंद्रित होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीयों और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाने की खुली अपील देखी जा रही है, जो कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
प्रवासी भारतीयों में बढ़ी असुरक्षा की भावना
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के बीच इन घटनाओं के कारण चिंता का वातावरण है। हाल में सामने आए कुछ वीडियो—जिनमें भारत के तिरंगे का अपमान और उकसाऊ नारे दर्ज हैं—ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। समुदाय प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा कूटनीतिक दबाव
भारत सरकार पहले ही कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ इस मुद्दे को आधिकारिक रूप से उठा चुकी है। कनाडा और यूके में कुछ सख़्त कदम उठने के बाद इन गतिविधियों की गति अपेक्षाकृत धीमी पड़ी, लेकिन अब खतरा ऑस्ट्रेलिया की ओर झुक गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह शिफ्ट दबाव से बचने और आंदोलन को किसी अन्य भौगोलिक क्षेत्र में सक्रिय रखने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
सोशल मीडिया बना कट्टरता का हथियार
एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म खालिस्तानी तत्वों के लिए मुख्य साधन बनते जा रहे हैं। गलत सूचनाएँ, हेट स्पीच और उकसावे से भरे वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित किए जा रहे हैं। इस डिजिटल प्रोपेगेंडा का लक्ष्य न केवल लोगों को भ्रमित करना है, बल्कि भारतीय समुदाय के खिलाफ आक्रामक भावनाएँ पैदा करना भी है। इससे सामाजिक सद्भाव और बहु-सांस्कृतिक ताने-बाने पर खतरा बढ़ सकता है।
शांति और सुरक्षा पर वैश्विक जिम्मेदारी
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की अलगाववादी गतिविधियाँ किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन कायम रखते हुए हिंसा और नफरत फैलाने वाले अभियानों पर नियंत्रण सुनिश्चित करे। भारतीय समुदाय ने भी संयम, कानूनी प्रक्रि
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