कोलकाता डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ रूसी डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौते की घोषणा की है। इस फैसले को अमेरिका की रूस नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य बढ़ती ईंधन कीमतों पर काबू पाना और अमेरिकी किसानों, ट्रक चालकों तथा अन्य उपभोक्ताओं को राहत देना है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस कदम की आलोचना की है।
रूस से तुरंत 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति
डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की योजना है। ट्रंप के मुताबिक, इसके अतिरिक्त भी आने वाले समय में करीब 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जा सकती है। हालांकि, इस ईंधन की खरीद के लिए भुगतान कौन करेगा और पूरी आपूर्ति कब तक होगी, इस बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश
अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ने के बीच ट्रंप ने इस समझौते को राहत देने वाला कदम बताया है। डीजल का इस्तेमाल कृषि कार्यों, माल ढुलाई, ट्रकों और कई अन्य क्षेत्रों में होता है। ईंधन महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से अतिरिक्त आपूर्ति आने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है।
रूस पर प्रतिबंधों में ढील, अमेरिकी नीति पर उठे सवाल
इस समझौते का एक अहम पहलू रूस के ईंधन निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देना है। अमेरिकी वित्त विभाग ने रूसी डीजल की कुछ खेपों को लेकर ऐसी अस्थायी अनुमति जारी की है, जिसके तहत 9 अक्टूबर तक जहाजों पर लादे गए डीजल पर प्रतिबंध अप्रैल 2027 तक लागू नहीं होंगे। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका ने मॉस्को की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूस से डीजल खरीदने की घोषणा को अमेरिकी प्रशासन की पिछली नीति से अलग कदम माना जा रहा है।
जेलेंस्की ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ हुए इस समझौते पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि रूस को आर्थिक लाभ पहुंचाने वाले फैसले युद्ध को लंबा खींचने में मदद कर सकते हैं। जेलेंस्की ने इस कदम को कमजोर फैसला बताते हुए कहा कि पुतिन के साथ ऐसे समझौते शांति स्थापित करने में मददगार नहीं होंगे। यूक्रेन की चिंता है कि ऊर्जा निर्यात से मिलने वाली अतिरिक्त आय का इस्तेमाल रूस अपनी युद्ध संबंधी गतिविधियों को जारी रखने के लिए कर सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका के फैसले पर सियासी विवाद
ट्रंप के इस फैसले की अमेरिका में भी आलोचना हुई है। कुछ अमेरिकी सांसदों ने सवाल उठाया है कि एक ओर रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी देश से ईंधन खरीदने की व्यवस्था क्यों की जा रही है। आलोचकों के मुताबिक, इससे रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति कमजोर पड़ सकती है। वहीं, ट्रंप प्रशासन के लिए बढ़ती घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित करना भी एक बड़ी चुनौती है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले महंगाई और ऊर्जा की कीमतें अहम राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं।
क्या रूस से डीजल खरीदने से सस्ता होगा ईंधन?
रूस से डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति का असर अमेरिका और वैश्विक बाजार पर कितना पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की उपलब्धता, रिफाइनरी उत्पादन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में केवल एक समझौते से डीजल की कीमतों में बड़ी गिरावट आना तय नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस से कितनी आपूर्ति वास्तव में पहुंचती है और इसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर कितना पड़ता है।