भोपाल: मध्यप्रदेश में ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन से बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए नए नियम बनाए जाने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। नई गाइडलाइन मिलने के बाद मध्यप्रदेश परिवहन विभाग इसे लागू करेगा। जरूरत के अनुसार जिला स्तर पर कलेक्टर भी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रावधान कर सकेंगे। प्रदेश में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और प्रमुख सड़कों पर लगने वाले जाम को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्र सरकार बनाएगी ई-रिक्शा संचालन की नई गाइडलाइन
मध्यप्रदेश के कई शहरों में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। प्रमुख मार्गों और चौराहों पर इनके अनियंत्रित संचालन से जाम की स्थिति बनती है। फिलहाल संचालन को लेकर स्पष्ट और एकसमान नीति की जरूरत महसूस की जा रही है।इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन तैयार की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने करीब डेढ़ माह पहले मंत्रालय को ई-रिक्शा संचालन के लिए नीति बनाने को कहा था।केंद्र की गाइडलाइन जारी होने के बाद मध्यप्रदेश सरकार यह तय करेगी कि उसे उसी रूप में लागू किया जाए या राज्य की परिस्थितियों के अनुसार कुछ बदलाव किए जाएं।
स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नियम बना सकेंगे कलेक्टर
नई व्यवस्था में जिला स्तर पर भी प्रशासन को अधिकार दिए जाने की तैयारी है। केंद्र की गाइडलाइन और राज्य की नीति के आधार पर कलेक्टर स्थानीय जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त प्रावधान कर सकेंगे।इससे अलग-अलग शहरों में सड़कों की चौड़ाई, यातायात का दबाव और ई-रिक्शा की संख्या को ध्यान में रखते हुए संचालन व्यवस्था निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
उदाहरण के तौर पर, जिन मार्गों पर पहले से यातायात का दबाव अधिक है, वहां ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक स्वरूप केंद्र की गाइडलाइन और राज्य सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
रंग के आधार पर अलग-अलग मार्ग तय करने की थी तैयारी
परिवहन विभाग की ओर से पहले ई-रिक्शा के रंग के आधार पर अलग-अलग मार्ग निर्धारित करने की तैयारी की जा रही थी। इसका उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करना और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करना था।अब केंद्र सरकार की प्रस्तावित गाइडलाइन के बाद इस व्यवस्था पर आगे निर्णय लिया जाएगा। राज्य परिवहन विभाग केंद्रीय दिशा-निर्देशों का अध्ययन करने के बाद तय करेगा कि प्रदेश में किस तरह के नियम लागू किए जाएं।
मध्यप्रदेश में ई-रिक्शा की संख्या 1.10 लाख तक पहुंची
प्रदेश में ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले चार वर्षों से हर साल करीब 20 हजार से 25 हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हो रहे हैं।
कुल पंजीकृत ई-रिक्शा: लगभग 1.10 लाख
हर साल नए पंजीकरण: करीब 20,000 से 25,000
प्रमुख समस्या: व्यस्त मार्गों और चौराहों पर यातायात का दबाव
ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के साथ इनके संचालन को व्यवस्थित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में नई गाइडलाइन से शहरों में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
परिवहन विभाग को केंद्र की गाइडलाइन का इंतजार
उप परिवहन आयुक्त के मुताबिक, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन मिलने के बाद यह देखा जाएगा कि मध्यप्रदेश में इसमें और कौन-कौन से प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।केंद्र की नीति मिलने के बाद राज्य सरकार और परिवहन विभाग आगे की प्रक्रिया तय करेंगे। इसके बाद जिला स्तर पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी बदलाव किए जा सकेंगे।नई व्यवस्था लागू होने के बाद ई-रिक्शा के संचालन, मार्ग निर्धारण और यातायात प्रबंधन को लेकर अधिक स्पष्ट नियम बनने की संभावना है। हालांकि, फिलहाल अंतिम नियमों और उनके लागू होने की तारीख का इंतजार है।