आज से मतदान शुरू हो गया हैं। एनडीए और इंडिया गठबंधन के इम्तिहान की भी घड़ी आ गई। आज पहला एग्जाम है। 21 राज्य और 102 सीटें। मतदान से पहले पॉलिटिकल पार्टियों के बीच इन दिनों कुछ ऐसा हुआ जिसे हमने अपने विशुद्ध राजनीति के कॉलम में जगह दी। आइए पढ़ते हैं उन दिलचस्प किस्सों को-
भाषण से प्रवचन तक
बिहार में पिछले कुछ सालों से एक दिलचस्प सियासी ट्रेंड देखा जा रहा है। कुछ IAS और IPS अफसर राजनीति में शामिल होकर नाम बनाने के लिए चुनावी जंग में मेहनत तो पूरी करते हैं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उनकी किस्मत दगा दे जाती है। ऐसा सभी राजनीतिक दलों में हो रहा है। अगर इसी आम चुनाव की बात करें तो कम से कम आधा दर्जन अधिकारी टिकट पाने की उम्मीद में राजनीति में आए थे, लेकिन जिस राजनीतिक दल से उन्हें उम्मीद थी, उससे निराशा मिली।
न्याय दें या गारंटी
कांग्रेस में इस बार बहुत ही गंभीर मंथन हुआ कि उनके चुनावी वादे का नाम क्या रखा जाए- न्याय या गारंटी? कई लोग इस पक्ष में थे कि गारंटी शब्द से जनता का कनेक्ट अधिक हो रहा है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनाव की मिसाल भी दी गई। कहा गया कि गारंटी शब्द से जनता अधिक जुड़ती है। लेकिन दूसरा वर्ग न्याय शब्द के पक्ष में था। उनका तर्क था कि अगर लोगों से संवाद करें तो न्याय शब्द अधिक जुड़ेगा। दिलचस्प बात है कि कांग्रेस न्याय और गारंटी के बीच उलझी रही और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में BJP ने गारंटी को अपना चुनावी वादा बना लिया। मोदी की गारंटी को चुनाव में BJP ने अपना पंच बना लिया। अब इसे लेकर जो गारंटी शब्द के समर्थन में थे, वे दबी जुबान में शिकायत कर रहे हैं कि कांग्रेस खुद ही बेहतर चीजों को आगे बढ़ाने में विफल हो जाती है, और BJP ने उस शब्द को भी हथिया लिया जिसे कांग्रेस ने ही स्थापित किया था।
माया ने उलझाया
इस बार उत्तरप्रदेश में मायावती के रुख से सभी पार्टियां उलझन में हैं। अमूमन माना जा रहा था कि मायावती के अकेले लड़ने से SP यानी समाजवादी पार्टी को अधिक नुकसान होगा। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BSP ने SP को कई सीटों पर नुकसान भी पहुंचाया था। तब कई मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे मायावती ने। लेकिन इस बार अंतिम समय में मायावती के रुख ने SP-BJP दोनों को उलझा कर रख दिया है। अब तक BSP ने जितने टिकट बांटे हैं, वे सिर्फ SP नहीं बल्कि BJP के लिए भी चिंता की बात है। मायावती ने कम से कम एक दर्जन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे BJP की चिंता बढ़ी है।
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